अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ
ITBP की शौर्य कमांडो टीम की तैनाती बढ़ाने की तैयारी है
कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए
India-China Border Tension Arunachal Pradesh: भारत और चीन के बीच रिश्ते सामान्य होने के दावों के बीच अरुणाचल प्रदेश से सीमा पर तनाव की खबर सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ इलाकों में ऐसी स्थिति अब भी बनी हुई है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
राजस्थान के अलवर में ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित कार्यक्रम में जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने सीमा पर हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच फेस-ऑफ की स्थिति बनी। कुछ स्थानों पर यह स्थिति अभी भी जारी है।
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल ने हाल ही में ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई लड़ाकू टीम तैयार की है। उनके मुताबिक, इस टीम ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ आमने-सामने की परिस्थितियों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ITBP की प्रत्येक सीमा बटालियन में ऐसे कमांडो तैनात करने की योजना है। इसका उद्देश्य बल की परिचालन क्षमता को मजबूत करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है।
ITBP DG के बयान के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सरकार चीन के मामले में लगातार रियायतें दे रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
रमेश ने कहा कि ITBP महानिदेशक ने सीमा पर तैनात भारतीय जवानों के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।उन्होंने स्थानीय लोगों की उन कथित शिकायतों का भी जिक्र किया, जिनमें कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट तक पहुंच प्रभावित होने की बात कही गई है। कांग्रेस नेता ने इसकी तुलना पूर्वी लद्दाख में पहले सामने आए सीमा विवाद से करते हुए सरकार से चीन के प्रति अपने रुख पर जवाब मांगा।
जयराम रमेश ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की प्रस्तावित 60,000 मेगावाट क्षमता वाली बांध परियोजना का उल्लेख किया।
कांग्रेस नेता के अनुसार, चीन की ये गतिविधियां भारत की क्षेत्रीय अखंडता, पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन चुनौतियों के मद्देनजर अधिक स्पष्ट और प्रभावी नीति अपनाने की मांग की।
कांग्रेस ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का आधार बनाया है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह करीब 99 अरब डॉलर था। आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के दौरान भारत ने चीन को लगभग 19.47 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि चीन से आयात करीब 131.63 अरब डॉलर रहा।
जयराम रमेश ने कहा कि चीन से बढ़ता आयात भारतीय उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME), पर दबाव डाल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह अभियान अब ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ में बदलता दिखाई दे रहा है। उनका तर्क है कि चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा केवल आर्थिक असंतुलन का मामला नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।