गृह मंत्री अमित शाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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आर्टिकल 370 से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तक, अमित शाह के 5 सबसे बड़े फैसले, जिसने बदली देश की तस्वीर

Amit Shah Birthday: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर जानिए अनुच्छेद 370, आंतरिक सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों और सहकारिता मंत्रालय से जुड़े उनके प्रमुख फैसले।

अक्षय साहू

Highlights:

  • अमित शाह 22 अक्टूबर 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं

  • 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधान निष्प्रभावी किए

  • गृह मंत्रालय ने आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा पर सख्त नीति अपनाई

Amit Shah 62nd Birthday: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे है। अमित शाह का नाम भारतीय राजनीति में नाम उन नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर ऐसे फैसले लिए जिसने देश की राजनीति सियासत और शासन व्यवस्था पर गहरी छाप छोड़ी है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने से लेकर आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और नक्सल मुक्त भारत बनाने तक, गृह मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल कई बड़े फैसलों का गवाह रहा है। उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उन अहम फैसलों के बारे में, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक व्यापक चर्चा बटोरी।

आर्टिकल 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला

5 अगस्त 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटाने का ऐलान किया। उनके पहले की सरकारें राजनीतिक कारणों से इससे बचती आ रही थीं, लेकिन मोदी सरकार ने आर्टिकल 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में पुनर्गठित करने का फैसला लिया। उस समय गृह मंत्री अमित शाह ने ही संसद में इस फैसले से जुड़े प्रस्ताव और विधेयक पेश किए। यह फैसला भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण और बहस के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।

अमित शाह

आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति

गृह मंत्री के रूप में अमित शाह के कार्यकाल में आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की नीतियां प्रमुख चर्चा में रहीं। आतंकवाद के वित्तपोषण पर कार्रवाई, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार ने अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया है। सरकार ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ को अपनी नीति का प्रमुख हिस्सा बताया।

नक्सल मुक्त भारत और सीमाओं पर फोकस

देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा पर नियंत्रण और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा अमित शाह और गृह मंत्रालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहे। इन मोर्चों पर सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और विकास योजनाओं के माध्यम से चुनौतियों से निपटने की कोशिश की।

गृह मंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2024 में 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा था, जिसे 30-31 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से पूरा घोषित किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अभियान के तहत देश के सभी नक्शल प्रभावित जिलों में अभियान चलाए गए। 2014 में भारत के करीब 124 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहीं 2026 में घटकर सिर्फ दो रह गए हैं। इसके अलावा सबसे अधिक प्रभावित जिले 35 से घटकर शून्य हो गए हैं। यह गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह

कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव

अमित शाह के गृह मंत्री रहते हुए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे तीन नए आपराधिक कानून बनाए गए। 1 जुलाई 2024 से लागू इन कानूनों ने औपनिवेशिक दौर के भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली। सरकार ने इन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि इनके क्रियान्वयन और कुछ प्रावधानों पर कानूनी व सार्वजनिक बहस भी हुई।

सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और नई पहल

जुलाई 2021 में केंद्र सरकार ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाया और अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी भी सौंपी। सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए विभिन्न पहल शुरू की गईं। इस मंत्रालय का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को अधिक संगठित और प्रभावी बनाना बताया गया।

अमित शाह के राजनीतिक सफर और गृह मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को अनुच्छेद 370, आंतरिक सुरक्षा, आपराधिक कानूनों में बदलाव और सहकारिता क्षेत्र की पहलों जैसे फैसलों के संदर्भ में देखा जाता है। उनके समर्थक इन कदमों को निर्णायक नीतिगत बदलाव मानते हैं, जबकि कुछ फैसलों पर विपक्ष और विभिन्न सामाजिक समूहों ने सवाल भी उठाए हैं।

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