गोवा में मंदिर में मची भगदड़ सीएम ने लिया जायजा (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
गोवा

Goa Temple Stampede: गोवा के शिरगांव में आयोजित श्री लैराई 'जात्रा' के दौरान मची भगदड़, 7 की मौत, 50 से अधिक घायल

गोवा से बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आ रही है। गोवा के शिरगांव में आयोजित की गई श्री लैराई 'जात्रा' के दौरान शुक्रवार 02 मई की रात भगदड़ मच गई। लैराई मंदिर में अचानक भगदड़ मचने से 7 लोगों की मौत की खबर सामने आई है।

प्रिया जैस

गोवा: गोवा से बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आ रही है। गोवा के शिरगांव में आयोजित की गई श्री लैराई 'जात्रा' के दौरान शुक्रवार 02 मई की रात एक भीषण दुर्घटना हो गई। बताया जा रहा है कि लैराई मंदिर में अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई और 69 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत गोवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा तब हुआ जब बड़ी की संख्या में श्रद्धालु इस पारंपरिक 'जात्रा' में शामिल होने भारी मात्रा में इकट्ठा हुए थे। भारी भीड़ के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई, जिससे भगदड़ जैसी गंभीर स्थिति बन गई और भगदड़ मच गई। घायलों में एक की हालत गंभीर बताई जा रही है जबकि भगदड़ में घायल अन्य लोग फिलहाल खतरे से बाहर बताए जा रहे है।

गोवा अस्पताल में भर्ती घायल

घायलों से मिले सीएम सावंत

भगदड़ की सूचना मिलते ही गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अस्पताल पहुंचे, जहां घायलों को भर्ती कराया गया था और स्थिति का जायजा लिया। गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने नॉर्थ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और बिचोलिम अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। देश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

क्या है श्री लैराई 'जात्रा'

गोवा के शिरोडा गांव में लैराई देवी को पूजा जाता है। लैराई देवी एक पूजनीय हिंदू देवी हैं, जिन्हें वहां पूजा जाता है। लैराई देवी को समर्पित इस मंदिर स्थानीय लोगों के साथ आस-पास के श्रद्धालु बड़ी मात्रा में आते है। जानकारी दें कि लैराई देवी 'जात्रा' को शिरगांव 'जात्रा' के नाम से भी जाना जाता है। ये जात्रा गोवा का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जो हर साल बिचोलिम तालुका के शिरगांव गांव में मनाया जाता है। इस उत्सव की विशेषता है कि इसमें आग पर चलने की परंपरा है। इसमें "धोंड" कहे जाने वाले श्रद्धालु जलते हुए शोलो पर नंगे पांव चलते हैं, जो उनकी उनकी आस्था और आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

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