भारतीय सिनेमा में महिला फिल्म निर्माता (फोटो-सोशल मीडिया)  
मनोरंजन

Women’s Day 2026: रीमा कागती से जोया अख्तर तक, महिला निर्देशकों ने बदली बॉलीवुड की कहानी

Female Filmmakers In Indian Cinema: रीमा कागती, किरण राव, ज़ोया अख्तर और मेघना गुलज़ार जैसी महिला निर्देशकों ने अपनी संवेदनशील कहानियों से भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी है।

सोनाली झा

Women Directors In Bollywood: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री लंबे समय तक पुरुष प्रधान मानी जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई महिला निर्देशकों ने अपनी प्रतिभा, दृष्टि और संवेदनशीलता से सिनेमा को नई दिशा दी है। ये निर्देशक न सिर्फ मनोरंजन कर रही हैं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को भी बड़े पर्दे पर मजबूती से पेश कर रही हैं। रीमा कागती से लेकर जोया अख्तर तक, कई महिला फिल्मकारों ने अपने काम से यह साबित किया है कि निर्देशन में जेंडर नहीं, बल्कि सोच और प्रतिभा मायने रखती है।

रीमा कागती बॉलीवुड की जानी-मानी निर्देशकों में शामिल हैं। उन्होंने साल 2007 में फिल्म हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड से निर्देशन की शुरुआत की, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। इसके बाद उन्होंने आमिर खान और रानी मुखर्जी की फिल्म तलाश का निर्देशन किया, जो अपनी रहस्यमयी कहानी और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए सराही गई। साल 2018 में उनकी फिल्म गोल्ड रिलीज हुई, जिसमें अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा उन्होंने ज़ोया अख्तर के साथ मिलकर प्रोडक्शन हाउस टाइगर बेबी फिल्म्स की सह-स्थापना भी की।

किरण राव

किरण राव ने साल 2011 में फिल्म धोबी घाट से निर्देशन की शुरुआत की। यह फिल्म मुंबई की जिंदगी और कला की दुनिया को बेहद खूबसूरती से दर्शाती है। हाल के वर्षों में उनकी फिल्म लापता लेडीज ने खासा ध्यान खींचा। ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सोच पर आधारित है। यह फिल्म भारत की ओर से एकेडमी अवॉर्ड्स के 97वें संस्करण के लिए आधिकारिक एंट्री भी बनी थी।

मेघना गुलजार

मेघना गुलजार भी उन निर्देशकों में शामिल हैं जो सामाजिक विषयों पर गंभीर और प्रभावशाली फिल्में बनाती हैं। उन्होंने नोएडा डबल मर्डर केस पर आधारित फिल्म तलवार का निर्देशन किया, जिसे आलोचकों और दर्शकों दोनों से सराहना मिली। इसके बाद उनकी फिल्म राज़ी बड़ी हिट साबित हुई, जिसमें आलिया भट्ट और विक्की मुख्य भूमिकाओं में थे। साथ ही उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी पर आधारित फिल्म छपाक और सैन्य अधिकारी की कहानी पर बनी सैम बहादुर का भी निर्देशन किया।

कई अन्य महिला निर्देशक भी कर रहीं बेहतरीन काम

इनके अलावा ज़ोया अख्तर, अपर्णा सेन, मीरा नायर, दीपा मेहता और तनुजा चंद्रा जैसी कई महिला निर्देशक भी इंडस्ट्री में मजबूत योगदान दे रही हैं। इन सभी ने अपने काम से यह साबित किया है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने की ताकत भी रखता है। महिला निर्देशकों की यह नई पीढ़ी बॉलीवुड को और ज्यादा संवेदनशील, सशक्त और विविधतापूर्ण बना रही है।

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