Vikramjeet Kanwarpal Biography: सेना की डिसीप्ललीन लाइफ छोड़ एक्टिंग की रंगीन दुनिया में कदम रखना कोई आसान फैसला नहीं होता है। बहुत कम ही ऐसे लोग होते हैं जो एक सफल करियर को पीछे छोड़कर अपने बचपन के अधूरे सपने को जीने का साहस दिखा पाते हैं। इंडियन आर्मी के एक एक्स ऑफिसर ने ठीक ऐसा ही कर दिखाया था। उन्होंने सेना में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद एक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी पहचान बनाई।
हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में 29 अगस्त 1968 को बिक्रमजीत कंवरपाल का जन्म हुआ था। उनका परिवार शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित रहा। उनके पिता द्वारका नाथ कंवरपाल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर कार्य करते थे। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए 1963 में अपनी अदम्य बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र हासिल किया था। पिता के इस गौरवशाली इतिहास और देशभक्ति से प्रभावित होकर बिक्रमजीत ने भी सेना में शामिल होने का फैसला किया। साल 1989 में वे भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हुए। लगभग 13 वर्षों तक सीमाओं पर देश की सेवा करने के बाद साल 2002 में वे मेजर के पद से रिटायर्ड हो गए।
आर्मी से रिटायर्ड होने के बाद ज्यादातर लोग एक शांत और आरामदायक जीवन पसंद करते हैं। इसके विपरीत बिक्रमजीत ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक्टिंग का सपना पूरा करने निकल पड़े। बचपन से ही उनके अंदर एक कलाकार बसता था जिसे वे अब बड़े पर्दे पर उतारना चाहते थे। साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म पाप के जरिए उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पेज 3, शाहरुख खान की फिल्म डॉन, रॉकेट सिंह, आरक्षण, मर्डर 2, 2 स्टेट, ओम शांति ओम और द गाजी अटैक जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी सशक्त रोल से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
फिल्मी पर्दे के अलावा टीवी सीरियल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उन्होंने शानदार काम किया। एक्टर अनिल कपूर के साथ पॉपुलर थ्रिलर सीरीज 24 और फेमस वेब सीरीज स्पेशल ओपस में उनके रोल को काफी सराहा गया। उन्होंने हमेशा हर रोल को अपनी सहज डायलॉग डिलीवरी से खास बना दिया। चाहे नकारात्मक भूमिका हो या फिर कोई गंभीर सहायक किरदार, वे हर रूप में बेहद स्वाभाविक नजर आते थे। प्रज्ञेश सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म शिनाख्त उनके करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई।
मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल ने अपनी जिंदगी में यह साबित कर दिखाया कि अगर लगन हो तो उम्र के किसी भी पड़ाव पर नए सपने साकार किए जा सकते हैं। उनका पूरा जीवन अनुशासन, साहस और कला के प्रति समर्पण की एक मिसाल बना रहा। हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था। 1 मई 2021 को 52 साल की उम्र में कोरोना संक्रमण के कारण उनका निधन हो गया। देश सेवा से लेकर सिनेमा के पर्दे तक का उनका यह अनूठा सफर हमेशा याद रखा जाएगा।