Highlights
आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले कथित वॉइस नोट और तस्वीरों की जांच जारी।
5 कारतूसों की डिलीट तस्वीरें रिकवर करने में जुटी पुलिस।
कथित कोडवर्ड और हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क की पड़ताल जारी।
4 आरोपियों से 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में पूछताछ की जानकारी।
Mumbai Crime Branch Investigation: बॉलीवुड गलियारों में बीते दिनों हुई एक सनसनीखेज घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया था, जब पॉपुलर एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर अचानक फायरिंग की गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच के हाथ अब कुछ ऐसे सुराग लगे हैं जो इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र की परतों को खोलने का काम कर रहे हैं।
मुंबई पुलिस लगातार इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है और अब आरोपियों के मोबाइल फोन से बरामद साक्ष्यों के आधार पर जांच की दिशा तय की जा रही है, जिससे जल्द ही कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच के हाथ 4 आरोपियों के मोबाइल फोन लगे, जिनकी तकनीकी जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस को इन फोनों से कुछ अहम वॉइस नोट्स मिले हैं, जिनमें हथियारों की खरीद-फरोख्त, उन्हें अपने पास रखने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से जुड़ी सिक्रेट बातचीत रिकॉर्ड है।
इसके साथ ही 5 कारतूसों की कुछ ऐसी तस्वीरें भी मिली हैं जिन्हें आरोपियों द्वारा डिलीट कर दिया गया था। अब पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उन डिलीट की गई तस्वीरों और डेटा को पूरी तरह रिकवर करने में जुटी है जिससे हथियारों की सप्लाई चैन का पूरा कच्चा-चिट्ठा पता किया जा सके।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले की गहराई से छानबीन करने पर पुलिस को यह भी पता चला कि अपराधी किस तरह से अपनी पहचान छिपाने की साजिश रच रहे थे। खबरों के अनुसार मुख्य संदिग्ध राधा के मोबाइल फोन में कुणाल नाम के शख्स का नंबर 'जय बलकारी' के नाम से सेव पाया गया है।
जांच एजेंसियों को पूरा शक है कि यह हथियारों के अवैध धंधों से जुड़े लोगों की पहचान को कानून की नजरों से बचाने के लिए उठाया गया एक सुनियोजित कदम था। इस मामले में राधा सुनील वर्मा, बबीता रामजतन राव, कुणाल संजयकुमार जामिनसिंह और सुमित बिजेंद्र सरोलिया की संदिग्ध भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है, जो इस पूरे जाल का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
कोर्ट ने इन चारों आरोपियों को पूछताछ के लिए आने वाली 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, जहां उनसे लगातार कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद इन हथियारों और बचे हुए कारतूसों को वापस दिल्ली ले जाने की पूरी प्लानिंग बनाई जा रही थी ताकि सारे सबूतों को मिटाया जा सके।
इसी के साथ मुंबई पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या सूरत या अन्य किसी शहर में इन हथियारों को ठिकाने लगाने के लिए कोई सेफ रास्ता तैयार किया गया था, क्योंकि बीते दिनों सूरत से हथियार और कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।