सोनम कपूर बेबी शावर (फोटो- सोशल मीडिया) 
मनोरंजन

सनातन परंपरा के साथ सोनम कपूर की गोद भराई, वीडियो शेयर कर बताया ‘सीमन्तोन्नयन’ का महत्व

Sonam Kapoor Seemantonnayan Sanskar: सोनम कपूर ने पारंपरिक अंदाज में अपनी गोद भराई की झलकियां शेयर कीं। समारोह में सनातन धर्म के ‘सीमन्तोन्नयन’ संस्कार को विधिवत निभाया गया।

सोनाली झा

Sonam Kapoor Baby Shower: ‘सावंरिया’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली अभिनेत्री सोनम कपूर जल्द ही दूसरी बार मां बनने जा रही हैं। हाल ही में उनके लिए पारंपरिक अंदाज में गोद भराई की रस्म आयोजित की गई, जिसकी झलकियां अब सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। खास बात यह रही कि इस समारोह में सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा ‘सीमन्तोन्नयन’ संस्कार को विधिवत निभाया गया।

सोनम कपूर ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर गोद भराई का एक भावुक वीडियो साझा किया है। वीडियो में कपूर परिवार और करीबी दोस्त मुस्कुराते हुए अभिनेत्री को आशीर्वाद देते नजर आ रहे हैं। हमेशा की तरह स्टाइलिश अंदाज में सजी सोनम ने इस खास मौके पर परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम पेश किया।

सीमन्तोन्नयन संस्कार का बताया महत्व

वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में सोनम ने ‘सीमन्तोन्नयन’ संस्कार का महत्व विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह सनातन धर्म के सोलह पवित्र गर्भ संस्कारों में से तीसरा संस्कार है, जो गर्भवती मां और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के सम्मान और सुरक्षा के लिए किया जाता है। सोनम ने लिखा कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस रस्म को गोद भराई, श्रीमंत, दोहले जेवन, शाद, सीमांतम, वलाइकाप्पु, पुलिक्कुडी और सदाबक्शन जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है।

सोनम कपूर ने कही ये बात

सोनम कपूर ने आगे लिखा कि यह रस्म उनके लिए और भी खास इसलिए बन गई क्योंकि उनके सभी करीबी दोस्त और पूरा परिवार इस अवसर पर मौजूद था। उन्होंने अपनी मां, सास और बहन का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने इस समारोह को बेहद प्यार और सम्मान के साथ आयोजित किया। अभिनेत्री ने लिखा कि मैं इस पल को कभी नहीं भूलूंगी। यह आशीर्वादों से भरी गोद भराई थी।

कब किया जाता है सीमन्तोन्नयन संस्कार

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सीमन्तोन्नयन संस्कार गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में किया जाता है। कई स्थानों पर इस रस्म के दौरान पति, पत्नी की मांग को गुलर की टहनी से भरकर मां और शिशु के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है। इसका उद्देश्य मां को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाना और प्रसव के समय होने वाली कठिनाइयों को कम करने की प्रार्थना करना है।

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