Salim Kumar Death In Hospital: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। अपनी बेहतरीन एक्टिंग से दर्शकों को हंसाने और रुलाने पर मजबूर करने वाले मशहूर अभिनेता सलीम कुमार का निधन हो गया है। सलीम कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। इस खबर के आते ही फिल्म इंडस्ट्री में और उनके प्रशंसकों में शौक की लहर दौड़ गई है।
बीती रात मलयालम फिल्म जगत को गहरा सदमा दे गई। अभिनेता सलीम कुमार को कोच्चि के एक प्राइवेट अस्पताल में बेहद गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया था। डॉक्टरों की पूरी टीम उन्हें बचाने की कोशिश में जुटी रही। तमाम कोशिशों और दुआओं के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
एक्टर सलीम कुमार की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी, बल्कि वे विभिन्न प्रतिभा के धनी थे। सलीम कुमार ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर और मिमिक्री के स्टेज से की थी। अपनी इसी कला के दम पर उन्होंने साल 1997 में आई फिल्म ‘इष्टमानु नूरु वट्टम’ से बिग स्क्रीन पर कदम रखा था। पहली ही फिल्म से उन्होंने बता दिया था कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। इसके बाद सलीम कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ते गए।
सलीम कुमार के करियर में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद साल 2010 में आई फिल्म ‘अदामिन्ते मकन अबू’ उनकी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी से हर किसी को रोने पर मजबूर कर दिया था।
इसी शानदार अभिनय के लिए सलीम कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्हें चार बार केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। वे सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने ‘करुथा जूथन’ जैसी फिल्मों का डायरेक्शन भी किया।
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बॉक्स ऑफिस सलीम कुमार ने जो लकीर खींच दी है, उसे मिटाना नामुमकिन है। ‘सत्यमेव जयते’, ‘तेनकासीपट्टनम’, ‘मीसा माधवन’, ‘सीआईडी मूसा’ और ‘मायावी’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में निभाए गए उनके किरदार आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। उन्होंने जितनी सहजता से कॉमेडी रोल किए, उतनी ही संजीदगी से गंभीर भूमिकाओं को भी पर्दे पर जिया। उनका जाना मलयालम सिनेमा के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।