रवीना टंडन ने की पीएम मोदी की तारीफ
भारतीय कला-संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल को सराहा
रवीना टंडन बोलीं- भारत टैलेंट से भरा है
भारतीय कला को दुनिया भर में पहचान मिलने की जरूरत
दोस्त शिवाली भोजबल की पेंटिंग्स देखकर हुईं हैरान
Raveena Tandon Praises PM Modi: 90 की दशक की खूबसूरत अदाकारा रवीना टंडन हाल ही में मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में एक आर्ट एग्जिबिशन देखने पहुंची थीं। जहां पहुंचकर उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की।
रवीना टंडन ने भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों को लेकर बड़ी बातें कही। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दुनियाभर में ज्यादा पहचान मिलनी चाहिए।
मीडिया इंटरव्यू में रवीना टंडन ने कहा कि मुझे लगता है कि हमारा देश, जिसे हम भारतवर्ष कहते हैं और पहले अखंड भारत के नाम से भी जानते थे, दुनिया भर में अपनी कला, हस्तशिल्प, संगीत, साहित्य और यहां तक कि पढ़ाई के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जाना जाता था। चाहे विज्ञान हो, ज्योतिष हो या कोई और क्षेत्र, हमारी अपनी एक खास पहचान रही है।
रवीना टंडन ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि हमारे भारत में टैलेंट की कमी है। हमारा देश प्रतिभा से भरा हुआ है। लेकिन हां, कला के इन रूपों को आगे लाने और इनके बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारतीय कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर रवीना ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि देश की कला को आगे लाने के लिए पहल की जा रही है, तो यह अच्छी बात है।
एक्ट्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में पहले से मौजूद और आज विकसित हो रही कलात्मक प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिलना चाहिए। इससे भारतीय विरासत को सम्मान मिलने के साथ कलाकारों की रचनात्मकता को भी पहचान मिल सकती है।
जहांगीर आर्ट गैलरी में रवीना अपनी दोस्त और आर्टिस्ट शिवाली भोजबल की पेंटिंग्स देखने पहुंची थीं। उन्होंने शिवाली की कला और उनकी कल्पनाशीलता की तारीफ की। रवीना ने बताया कि वह उन्हें कई सालों से जानती हैं, लेकिन उनकी पेंटिंग्स में नजर आने वाली विविधता देखकर वह भी हैरान रह गईं।
रवीना के अनुसार, हर पेंटिंग की अपनी प्रेरणा और अलग विजुअल अपील है। अलग-अलग थीम और रचनात्मक अंदाज इन कलाकृतियों को खास बनाते हैं।
रवीना टंडन की इस बातचीत में भारतीय कला को व्यापक मंच देने की जरूरत प्रमुखता से सामने आई। उनका मानना है कि देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कलाकारों और उनकी रचनाओं को प्रोत्साहित करना जरूरी है। जहांगीर आर्ट गैलरी में शिवाली भोजबल की पेंटिंग्स की सराहना करते हुए उन्होंने भारतीय कला की विविधता और रचनात्मक क्षमता को भी रेखांकित किया।