Ramayana Bahubali Connection: भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रामायण के विजुअल्स सामने आते ही सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। दर्शकों ने इस महागाथा के सीन्स की तुलना एसएस राजामौली की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बाहुबली से करना शुरू कर दिया है। दोनों ही फिल्में अपने विशाल कैनवास, भव्य सेट और भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट्स के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, जब इन दोनों फिल्मों के सीन्स को ध्यान से देखा जाता है, तो तकनीक, मेकिंग स्टाइल और सीन का स्तर काफी बुनियादी फर्क साफ तौर पर दिखता है।
बाहुबली और रामायण के बीच सबसे बड़ा फर्क रियलिज्म और डिजिटल आर्ट का है। बाहुबली में डायरेक्टर राजामौली ने असली लोकेशंस, वास्तविक विशाल सेटों और भारी भीड़ के लिए जूनियर आर्टिस्ट्स का बखूबी इस्तेमाल किया था। इसके विपरीत, रामायण के सीन्स में आधुनिक तकनीक और कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी का असर बहुत ज्यादा दिखाई दे रहा है। क्राउड सीन्स में जहां बाहुबली के चेहरे और हाव-भाव अलग नजर आते थे, वहीं रामायण में तकनीक से तैयार पैटर्न जैसा असर महसूस होता है। यहां तक कि झरने और बैकग्राउंड के विजुअल्स में भी नेचुरल सीन्स के बजाय डिजिटल बैकड्रॉप की झलक मिलती है।
फिल्मों में महिला रोल के एक्शन सीन्स को लेकर भी काफी दिलचस्प मोड़ सामने आया है। बाहुबली में अनुष्का शेट्टी का देवसेना अवतार मिट्टी से जुड़ा और बेहद आक्रामक था, जबकि रामायण में ढाल-तलवार के साथ नजर आ रहीं साई पल्लवी का पोज काफी प्रभावशाली है।
हालांकि उनके पीछे की संरचनाएं थोड़ी आधुनिक 3डी मॉडल जैसी लगती हैं। इसके अलावा बाहुबली के उड़ने वाले हंस रूपी जहाज के सामने रामायण का पुष्पक विमान बेहद मॉर्डन, चमकदार और भव्य रूप में सामने रखा गया है।
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फिल्म के निर्माण के दौरान सेट डिजाइनिंग बेहद अहम भूमिका निभाती है। महिष्मती साम्राज्य के निर्माण के लिए फिल्म 'बाहुबली' की टीम ने वास्तविक खंभे और विशाल द्वार खड़े किए थे, जिससे उनमें इतिहास की पुरानी बनावट झलकती थी।
दूसरी ओर, 'रामायण' के सेट में भव्यता का पैमाना बेशक बहुत ऊंचा है, लेकिन 3डी मॉडलिंग के कारण उसमें वह प्राचीनता और पुरानापन थोड़ा कम नजर आ रहा है। पौराणिक कथाओं पर आधारित इस महाकाव्य में उड़ते हुए ऐरावत जैसे काल्पनिक तत्वों को आधुनिक एनीमेशन का सहारा देकर पेश किया गया है।