प्यारेलाल (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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85 रुपये की नौकरी से शुरू हुआ सफर, फिर बॉलीवुड पर राज करने लगे प्यारेलाल, ऐसी है संघर्ष से सफलता की कहानी

Laxmikant Pyarelal Music Career: संगीतकार प्यारेलाल का जन्म 3 सितंबर 1940 को हुआ था। महज 10 साल की उम्र में लक्ष्मीकांत से प्यारेलाल की दोस्ती हुई, जो आगे चलकर मशहूर संगीत जोड़ी बनी।

सोनाली झा

Pyarelal Birthday Special: दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल का जन्म 3 सितंबर 1940 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। उनका पूरा नाम प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा बताया जाता है। बचपन काफी संघर्षों में गुजरा। कम उम्र में मां का निधन हो गया। उनके पिता पंडित रामप्रसाद ट्रंपेट बजाते थे और चाहते थे कि बेटा वायलिन सीखे। प्यारेलाल ने महज 8 साल की उम्र में वायलिन सीखना शुरू किया और रोजाना कई घंटे अभ्यास करते थे।

प्यारेलाल ने गोअन संगीतकार एंथनी गोंजाल्विस से वायलिन की ट्रेनिंग ली। आर्थिक तंगी के चलते वह पढ़ाई भी पूरी नहीं कर सके। बाद में उन्हें मुंबई के रंजीत स्टूडियो के ऑर्केस्ट्रा में नौकरी मिली। प्यारेलाल की मुलाकात लक्ष्मीकांत से महज 10 साल की उम्र में हुई थी। दोनों सुरील कला केंद्र में संगीत सीखते थे। समान उम्र और आर्थिक परिस्थितियों ने दोनों को करीब ला दिया और देखते ही देखते यह दोस्ती जिंदगी भर की संगीत साझेदारी में बदल गई। 1963 में फिल्म पारसमणि से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने बतौर संगीतकार अपना सफर शुरू किया।

प्यारेलाल

रफी, किशोर और मुकेश को एक साथ गवाया

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने अपने दौर के लगभग सभी बड़े गायकों के साथ काम किया। उनकी खास उपलब्धियों में फिल्म अमर अकबर एंथनी का गाना हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें भी शामिल है, जिसमें किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मुकेश और लता मंगेशकर ने एक साथ आवाज दी थी। बताया जाता है कि प्यारेलाल ने अपने गुरु एंथनी गोंजाल्विस को श्रद्धांजलि देने के लिए माय नेम इज एंथनी गोंजाल्विस गाने की धुन तैयार की थी।

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। दोस्ती, मिलन, जीने की राह, अमर अकबर एंथनी, सत्यम शिवम सुंदरम, सरगम और कर्ज जैसी फिल्मों के संगीत ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।

प्यारेलाल

दोस्त के जाने के बाद भी नाम नहीं बदला

1998 में लक्ष्मीकांत के निधन के बाद प्यारेलाल ने फिल्मों में संगीत देना काफी कम कर दिया। हालांकि उन्होंने कुछ प्रोजेक्ट्स पर अकेले काम किया, लेकिन अपने संगीत के साथ हमेशा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल नाम ही इस्तेमाल किया। यही उनके दोस्त के प्रति उनकी उस दोस्ती और सम्मान की सबसे खूबसूरत मिसाल है, जो महज 10 साल की उम्र में शुरू हुई थी।

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