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'पहला प्यार दूसरी बार' लव रंजन के प्रोडक्शन में बनी रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है।
'पहला प्यार दूसरी बार' का निर्देशन अनुज सैनी ने किया है।
फिल्म की कहानी दिल्ली में साथ रहने वाले तीन दोस्तों और उनके अधूरे प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म की कमजोर पटकथा और अनुमानित कहानी फिल्म की सबसे बड़ी कमियां हैं।
नवभारत लाइव ने 'पहला प्यार दूसरी बार' को 5 में से 2 स्टार दिए हैं।
Pehla Pyaar Doosri Baar Review: लव रंजन के प्रोडक्शन में बनी नई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'पहला प्यार दूसरी बार' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है, लेकिन यह दर्शकों के दिलों में वह खास स्पार्क जगाने के लिए संघर्ष करती नजर आती है। अनुज सैनी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2011 की ब्लॉकबस्टर 'प्यार का पंचनामा' के फॉर्मूले को नए जेन जी अंदाज में पेश करने का प्रयास करती है। नए चेहरों और स्टाइलिश लोकेशंस के बावजूद कहानी अपनी पकड़ मजबूत नहीं बना पाती। नवभारत लाइव इस फिल्म को 2 स्टार्स देता है और इसकी वजह जानने के लिए पढ़ें फिल्म का ये रिव्यू।
फिल्म की कहानी दिल्ली के बाहरी इलाके में एक साथ फ्लैट शेयर करने वाले तीन दोस्तों, गोविंद उर्फ गोवी यानी स्पर्श वालिया, वेदांत यानी कुणाल वैद्य और शिवी यानी सरगुन कौर लुथरा के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एक स्कूल रियूनियन के बहाने ये तीनों अपने अधूरे प्यार को हासिल करने की कोशिश करते हैं।
शिवी को अपने हॉट सीनियर तुषार यानी करण शेरगिल पर क्रश है, वहीं गोवी और वेदांत भी क्रमशः गहना यानी अलीशा चोपड़ा और सिमरन यानी साक्षी वैद्य का दिल जीतने की होड़ में लग जाते हैं। क्या इन सभी को इनका 'पहला प्यार दूसरी बार' मिल पाएगा या दिल टूटने का सामना करना पड़ेगा, पूरी पटकथा इसी सवाल के आसपास बुनी गई है।
निर्देशन के स्तर पर अनुज सैनी ने फिल्म को विजुअली काफी चमकदार और मॉडर्न बनाया है, लेकिन पटकथा बेहद कमजोर और अनुमानित लगती है। कलाकारों के प्रदर्शन की बात करें तो सरगुन कौर लुथरा ने एक बिंदास और बेबाक लड़की का किरदार निभाने की कोशिश की है, हालांकि उनका रोल काफी गढ़ा हुआ सा महसूस होता है।
स्पर्श वालिया और कुणाल वैद्य ने अपने किरदारों में ताजगी भरने की कोशिश की है, पर उनके डायलॉग्स में वह धार और टाइमिंग नजर नहीं आती जो कभी कार्तिक आर्यन और दिव्येंदु की जोड़ी में देखने को मिलती थी।
फिल्म के सकारात्मक पहलू की बात करें तो इसका क्लाइमेक्स सीन, जहां 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का स्पूफ अंदाज देखने को मिलता है, दर्शकों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान लाने में कामयाब होता है। हालांकि, लव रंजन की फिल्मों का वह पुराना ढर्रा, जहां लड़कियों को ही रिश्ते खराब करने की वजह दिखाया जाता है, यहाँ भी दोहराया गया है जो अब काफी उबाऊ लगता है।
कुल मिलाकर, 'पहला प्यार दूसरी बार' कुछ रंगीन फ्रेम और नए चेहरों के अलावा कुछ खास नया पेश नहीं कर पाती। यदि आप बिना किसी बड़ी उम्मीद के सिर्फ टाइम-पास देखना चाहते हैं तो इसे चुन सकते हैं, अन्यथा यह फिल्म आपको खास प्रभावित नहीं करेगी।