Panchayat Season 4 Review: चुनावी दंगल ने लील ली कहानी की मासूमियत  
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पंचायत सीजन 4 रिव्यू: चुनावी दंगल ने लील ली कहानी की मासूमियत

पंचायत का सीजन 4 प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुका है। इसे लोग देख रहे हैं और पसंद भी किया जा रहा है, लेकिन पिछले सीजन के मुकाबले इस सीजन में आपको इमोशन, जज्बात और कॉमेडी सब कुछ कम नजर आएगा।

अनिल सिंह

जितेंद्र कुमार, नीना गुप्ता, रघुवीर यादव, फैसल मलिक, दुर्गेश कुमार, चंदन रॉय, सुनीता राजवार, पंकज झा और सांविका स्टारर पंचायत का सीजन 4 रिलीज हो चुका है। अगर आप वेब सीरीज पंचायत 4 देखने जा रहे हैं, तो बेशक जाइए सीरीज का चौथा सीजन देखने लायक तो है ही, लेकिन पंचायत 4 में आपको कुछ कमियां जरूर खलेंगी। तीन सीजन ने आपको खूब एंटरटेन किया। मगर इस बार चुनावी दंगल के बीच गांव की असली मासूमियत दबी रह गई है।

पंचायत 4 की कहानी

पंचायत 4 की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां सीजन 3 और हुआ था। सीजन 3 का अंत इस सवाल के साथ हुआ था प्रधान पर गोली किसने चलवाई। सीजन 3 का अंत इस बात का संकेत था कि सीजन 4 में चुनावी दंगल देखने को मिलेगा, वह सब कुछ देखने को मिला, लेकिन चुनावी दंगल के बीच ग्रामीण जीवन के छोटे-छोटे जज्बातों की कमी पंचायत 4 में देखने को मिल रही है। सचिव, प्रधान, प्रहलाद और विकास के बीच का बॉन्ड बिखरा हुआ नजर आ रहा है। सब चुनावी रेस में लगे हुए हैं।

क्रांति देवी और नीना गुप्ता के बीच प्रधान बनने की होड़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस होड़ में एक दूसरे को नीचा दिखाने का जो सिलसिला चला, उसी पर ज्यादा फोकस किया गया। पंचायत वेब सीरीज ग्रामीण जीवन की जो छवि पेश करने के लिए पहचानी जाती है, पंचायत 4 में वह कमजोर दिख रही है। मंजू देवी चुनाव जीत पाती है या नहीं प्रधान पर गोली किसने चलवाई थी, विधायक के अलावा कहानी में एक विलेन और है, यह सब जानने के लिए आपको पंचायत 4 को देखना होगा।

डायरेक्शन और कलाकारों के एक्टिंग की अगर बात करें तो कलाकारों की एक्टिंग को 10 में 10 अंक दिए जा सकते हैं, लेकिन डायरेक्शन कहीं ना कहीं कमजोर पड़ा है। कहानी कहानी ना कहीं कमजोर पड़ी है, यह कहा जा सकता है। जाहिर तौर पर वेब सीरीज का चौथा सीजन है ऐसे में कहानी में खिंचाव होना लाजमी है लेकिन दर्शकों को यह पता चल जाए की कहानी खींची जा रही है, यहीं स्टोरी टेलर फेल हो जाता है। पिछले सीजन के मुकाबले भले ही पंचायत का कमजोर रहा हो, लेकिन लोग अब भी इस उम्मीद में हैं कि आने वाले वक्त में कहानी में सुधार किया जाएगा। क्योंकि पंचायत को लेकर वह बेहतर स्क्रीनप्ले, कहानी, सिनेमैटोग्राफी और डायरेक्शन की उम्मीद करते हैं, सिर्फ एक्टिंग से कोई भी फिल्म या सीरीज बेहतर नहीं बनाई जा सकती।

देखने लायक है या नहीं

पंचायत 4 की कहानी भले ही कमजोर पड़ती दिख रही हो, लेकिन यह देखने लायक जरूर है, कुछ नहीं तो आप कलाकारों की एक्टिंग के लिए इसे जरूर देख सकते हैं।

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