Noor Jehan Biography: संगीत की कोई सीमा नहीं होती, यह बात अक्सर कही जाती है। लेकिन जब 2 देशों के बीच कड़वाहट और तनाव का माहौल हो, तब भी अगर एक आवाज़ सीमा के दोनों पार समान रूप से दिलों को छू ले, तो उसे संगीत का चमत्कार ही कहा जाएगा। ऐसी ही एक जादुई आवाज़ की मालिक थीं पाकिस्तान की फेमस सिंग और एक्ट्रेस नूरजहां।
उनकी सिंगिंग इतनी प्रभावशाली थी कि भारत की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर भी उनकी कला की बेहद मुरीद थीं। नूरजहां की बर्थ एनिवर्सिरी के खास मौके पर उनकी सुरीली ज़िंदगी और भारतीय संगीत प्रेमियों के साथ उनके गहरे जुड़ाव को याद करना बेहद दिलचस्प हो जाता है।
नूरजहां का संगीत सफर केवल एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहा। बटवारे से पहले के दौर में उन्होंने भारतीय सिनेमा और म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बना ली थी। जब वह गाती थीं, तो सुनने वाला हर शख्स उनकी तान और लय में खो जाता था।
यही वजह है कि बटवारे के बाद पाकिस्तान जाने के बाद भी भारत में उनकी पॉपुलेरिटी में रत्ती भर भी कमी नहीं आई। भारतीय फैंस रेडियो के ज़रिये उनके गीतों का बेसब्री से इंतज़ार करते थे। उनकी सुरीली तान आज भी पुराने संगीत के शौकीनों के दिलों में रसीली यादें बनकर बसती है।
भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में लता मंगेशकर को एक देवी का दर्जा हासिल है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लता जी खुद नूरजहां की गायकी से बेहद प्रभावित थीं। वह अक्सर नूरजहां के गाने सुना करती थीं और उनकी आवाज़ के निखार और हरकत की तारीफ करते नहीं थकती थीं। दोनों महान गायिकाओं के बीच आपसी सम्मान और प्रेम का एक बेहद खूबसूरत रिश्ता था।
जब भी उन्हें एक-दूसरे से बात करने या मिलने का मौका मिलता, तो संगीत और कला की गहरी समझ उनके बीच के डायलॉग को और भी आत्मीय बना देती थी। यह रिश्ता दिखाता है कि सच्चा कलाकार हमेशा दूसरी प्रतिभा का सम्मान करता है।
फेमस म्यूजिक डायरेक्टर सी. रामचंद्र दोनों महान सिंगर की आवाज़ में एक युगल गीत रिकॉर्ड करने की इच्छा रखते थे। इस योजना को साकार करने के लिए वे लता मंगेशकर के साथ अटारी बॉर्डर तक पहुंच गए थे।
हालांकि वीजा और पासपोर्ट संबंधी प्रशासनिक अड़चनों के कारण लता जी को सीमा पार करने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस बात की जानकारी मिलते ही नूरजहां भी पाकिस्तान की तरफ से सरहद के ज़ीरो प्वाइंट तक पहुंच गईं। सीमा के उस तारों के घेरे के पास दोनों फनकारों का आमना-सामना हुआ।
जैसे ही लता मंगेशकर और नूरजहां ने एक-दूसरे को देखा, वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं। सी. रामचंद्र ने अपनी आत्मकथा में ये बात लिखी गई है कि दोनों गायिकाएं एक-दूसरे को देखते ही फूट-फूटकर रोने लगी थीं।
वह लम्हा इतना भावुक करने वाला था कि वहां मौजूद हर अधिकारी और दर्शक हैरान रह गया। उन आंसुओं ने यह साफ़ संदेश दिया कि भले ही नक्शे पर लकीरें खींचकर देशों को बांट दिया गया हो, लेकिन दिलों के आपसी प्रेम और सांस्कृतिक जुड़ाव को कोई सीमा बांध नहीं सकती।
नूरजहां का जुड़ाव सिर्फ लता जी तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकारों के साथ उनके बेहद आत्मीय संबंध थे। बॉलीवुड के फेमस अभिनेता धर्मेंद्र के साथ भी उनकी गहरी दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा।
नूरजहां ने अपने लंबे और शानदार संगीत सफर में उर्दू, पंजाबी और सिंधी सहित अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में बेहतरीन नगमे गाए। वे हर सुर और ताल को बेहद सुगमता के साथ साध लेती थीं। उनकी इस अद्वितीय कला के लिए पाकिस्तान सरकार ने उन्हें 'प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस' और 'तमगा-ए-इम्तियाज' जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से भी नवाज़ा था।