स्मृति ईरानी (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
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KSBKBT Spoiler: लहूलुहान हुआ पार्थ, वैष्णवी के लिए किया गुंडों का सामना, दामिनी का तुलसी के लिए ओपन चैलेंज

KSBKBT Twist: वीरानी परिवार में प्रॉपर्टी को लेकर घमासान शुरू हो चुका है। दूसरी तरफ पार्थ का वैष्णवी के लिए गुंड़ों से आमना-सामना हुआ है। वहीं कहानी में आप देखेंगे तुलसी और दामिनी की जोरदार टक्कर।

यति सिंह

KSBKBT Upcoming Episode: सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में आपने देखा कि पार्थ उस वक्त सन्न रह जाता है, जब कुछ गुंडें वैष्णवी को परेशान कर उसके साथ बदतमीजी कर रहे हैं। अपने प्यार को बचाने के लिए पार्थ बिना सोचे-समझे अकेले उन गुंडों का सामना कर रहा है। लेकिन गुंडें-बदमाश पार्थ पर भारी पड़ते हैं। और पार्थ इस हाथापाई में बुरी तरह घायल हो जाता है।

लेकिन ठीक उसी समय कहानी में रियो की एंट्री हो जाती है। रियो फिल्मी अंदाज में सारे गुंडों से भिड़ जाता है। और पार्थ और वैष्णवी को गुंडों से बचा लाता है। लेकिन इसी बीच रियो पार्थ तो ताना मारने से पीछे नहीं हटता कहता है, कि फिजिकली कमजोर है, अपने प्यार की सेफ्टी भी नहीं कर सकता।

तुलसी के फैसले से मचा बवाल

सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में आपने देखा कि शांति निकेतन में परिवार की मुखिया तुलसी अपनी जिम्मेदारियों से संयास लेने की सोच रही है। तुलसी घर के बड़ों के साथ ये चर्चा कर रही है, कि अब परिवार के कारोबार की जिम्मेदारी परिवार के ही किसा काबिल इंसान को दी जाए। जब तुलसी परिवार से इस बारे में पूछती है, तो हेमंत बाहर रहने की वजह से इस बात के लिए मना कर देता है। और गौतम व्यस्त रहने के कारण पीछे हट जाता है। और करण अपने काम में बिजी है। ऐसे में तुलसी के पास 3 विकल्प होते है, रियो, पार्थ और नकुल। वहीं गौतम तुलसी को बोलता है, कि नकुल को इन सब में नहीं लाया जाए क्योंकि वह पढ़ाई कर रहा है।

पार्थ की हालत देख सबको लगा शौक

कहानी में आगे जब सब लोग पार्थ को घायल देखते हैं, तो पूरा विरानी परिवार को झटका लग जाता है। रियो बड़ी चालाकी अपनाते हुए सबको बताता है, कि कैसे पार्थ गुंडों से पीट रहा था और उसने उसकी जान बचाई। वहीं तुलसी को रियो की इस बात पर बहुत गर्व महसूस होता है।

लेकिन नंदिनी रियो की नीयत पर शक करती है। रियो एस बात का ऐलान करता है, कि आज से वह करण को अपना पिता कहेगा। दूसरी तरफ पार्थ और नंदिनी रियो की बात सुनकर बुरी तरह बिखर जाते हैं।

चाबियों के बंटवारे को लेकर छलका दामिनी का दर्द

सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में आप देखेंगे कि तुलसी चाबियों का बंटवारा करते हुए तिजोरी और मकान की मेन चाबी छोटी बहू नंदिनी को सौंप देती है। यह देखकर बड़ी बहू दामिनी को बहुत चोट पहुंचती है। क्योंकि दामिनी कुद को जेठानी और बड़ी बहू होने के नाते खुद को चाबियों का असली हकदार मानती है।

लेकिन फिर भी दामिनी तुलसी वीरानी के फैसले को सम्मान देती है। बाद में तुलसी से पूछती है, कि कारोबार में नकुल को शामिल क्यों नहीं किया गया? तुलसी उसको बताती है, कि ये फैसला गौतम का था। लेकिन तुलसी दामिनी को पूरा विश्वास दिलाती है, कि नकुल की पढ़ाई का पूरा खर्च और प्रोपर्टी पर पूरा नकुल का हा।

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