अर्चना पूरन सिंह (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया) 
मनोरंजन

14-14 घंटे काम और नो लंच ब्रेक, Archana Puran Singh ने इंडस्ट्री के कामकाज पर उठाए सवाल, बताई सच्चाई

Archana Puran Singh Statement: अर्चना पूरण सिंह ने लंबे वर्किंग आवर्स और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि कई बार 14 घंटे काम करवाया जाता है और खाना तक नहीं मिलता।

सोनाली झा

Archana Puran Singh On Working Hours Issue: फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे छिपी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान अर्चना पूरण सिंह ने शूटिंग सेट्स पर काम करने की परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कलाकारों और क्रू मेंबर्स को अक्सर तय समय से कहीं ज्यादा घंटों तक काम करना पड़ता है और कई बार बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।

अर्चना के मुताबिक, शूटिंग के दौरान काम के घंटे 12 से बढ़ाकर 13-14 घंटे तक कर दिए जाते हैं, जो कि काफी थकाने वाला होता है। इतना ही नहीं, कई बार लंच ब्रेक तक नहीं दिया जाता। उन्होंने इसे सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि सोच की कंजूसी बताया। उनका कहना है कि सेट पर काम करने वाले लाइटमैन और अन्य क्रू मेंबर्स को भी धूप में घंटों खड़े रहना पड़ता है, लेकिन उन्हें सही समय पर खाना या आराम नहीं मिल पाता।

क्रू मेंबर्स की हालत पर जताई चिंता

अर्चना पूरण सिंह ने खासतौर पर लाइटमैन और स्पॉटबॉय जैसे ग्राउंड स्टाफ की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन उनके लिए सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाता। कई बार उनके पास कोई असिस्टेंट भी नहीं होता, जो उन्हें पानी या हल्का खाना दे सके। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ प्रोडक्शन हाउस इतने सख्त होते हैं कि लोग मजाक में उन्हें उनके खाने के स्तर से पहचानने लगते हैं।

अन्य कलाकारों ने भी उठाई आवाज

इस मुद्दे पर सिर्फ अर्चना ही नहीं, बल्कि कई अन्य कलाकार भी अपनी आवाज उठा चुके हैं। सान्या मल्होत्रा ने कहा कि शूटिंग के दौरान इतनी भागदौड़ होती है कि जरूरी ब्रेक्स को नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं राजकुमार राव का मानना है कि अगर शेड्यूल को सही तरीके से प्लान किया जाए, तो समय पर खाना और आराम देना बिल्कुल संभव है। अभिषेक बनर्जी ने भी इसे बड़ी सोच की कमी बताया।

वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहस तेज

इससे पहले दीपिका पादुकोण भी लंबे वर्किंग आवर्स को लेकर अपनी चिंता जता चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कुछ प्रोजेक्ट्स इसलिए छोड़ दिए थे क्योंकि उनकी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग पूरी नहीं की गई। इन खुलासों के बाद फिल्म इंडस्ट्री में वर्क-लाइफ बैलेंस और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कलाकारों और क्रू मेंबर्स की सेहत और आराम को प्राथमिकता देना अब समय की जरूरत बन चुका है।

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