अभिषेक बनर्जी, फोटो- सोशल मीडिया 
विधानसभा चुनाव 2026

बंगाल चुनाव: दीदी के भतीजे और TMC के चाणक्य, फुटबॉल के मैदान से संसद तक का सफर, जानिए अभिषेक बनर्जी का इतिहास

Abhishek Banerjee Biography: डायमंड हार्बर से सांसद और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी का सफर दिलचस्प है। अभिषेक ने बहुत कम उम्र में राजनीति के बड़े मुकाम हासिल किए हैं।

प्रतीक पाण्डेय

Who is Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी युवा नेतृत्व की बात होती है, तो एक चेहरा सबसे पहले उभरता है। वह चेहरा है अभिषेक बनर्जी का, जिन्होंने अपनी मेहनत और रणनीति से खुद को ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी के तौर पर मजबूती से स्थापित किया है। कोलकाता की गलियों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज दिल्ली की संसद तक पहुंच चुका है।

अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक जीवन में केवल चुनावी जीत ही नहीं, बल्कि कई उतार-चढ़ाव और बड़ी चुनौतियां भी शामिल रही हैं। अभिषेक ने जिस तरह से पार्टी के भीतर अपनी जगह बनाई है, वह बंगाल की बदलती सियासी हवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

दिल्ली की पढ़ाई और राजनीति में अचानक एंट्री

अभिषेक बनर्जी का जन्म 7 नवंबर 1987 को कोलकाता में एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ था। वे अमित बनर्जी और लता बनर्जी के पुत्र हैं और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सगे भतीजे हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा कोलकाता के नवा नालंदा और एम.पी. बिरला फाउंडेशन जैसे स्कूलों में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने भारतीय योजना और प्रबंधन संस्थान से एमबीए और बीबीए की डिग्री हासिल की। साल 2011 में जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने दशकों पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका, तब अभिषेक ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्हें पार्टी की युवा शाखा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, जिससे वे युवाओं के बीच एक लोकप्रिय चेहरा बनकर उभरे। निजी जीवन में उन्होंने साल 2012 में रुजीरा से शादी की और आज उनके दो बच्चे, अजानिया और अयांश हैं।

डायमंड हार्बर में जीत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया

अभिषेक बनर्जी का चुनावी सफर साल 2014 में शुरू हुआ जब उन्होंने डायमंड हार्बर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से अपनी पहली जीत दर्ज की। उस समय वे सदन के सबसे युवा सांसदों में से एक थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और साल 2019 के चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार को भारी मतों से पराजित किया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी सफलता साल 2024 के आम चुनाव में देखने को मिली। इस चुनाव में उन्होंने सात लाख से भी अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। संसद के भीतर भी वे काफी सक्रिय रहे हैं और वाणिज्य, वित्त, रेलवे और विदेश मामलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2021 में उन्हें तृणमूल कांग्रेस का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया, जो पार्टी में उनके बढ़ते कद का प्रमाण है।

जांच एजेंसियों के रडार पर टीएमसी का ये चेहरा

सियासी ऊंचाइयों के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी का नाम कई बड़े विवादों और कानूनी जांचों में भी उछलता रहा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के सिलसिले में उन्हें कई बार नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। इस घोटाले में सरकारी स्कूलों में अवैध तरीके से नियुक्तियां करने का आरोप है, जिसकी जांच सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियां कर रही हैं। इससे पहले कोयला चोरी से जुड़े एक अन्य मामले में भी केंद्रीय एजेंसियों ने उनसे लंबी पूछताछ की थी। हालांकि अभिषेक इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं।

फुटबॉल के मैदान से संसद तक का अनोखा सफर

अभिषेक बनर्जी की पहचान केवल एक नेता के तौर पर नहीं है, बल्कि उन्हें खेल प्रेमी के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए एम.पी. कप फुटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने डायमंड हार्बर फुटबॉल क्लब की स्थापना भी की है, जो स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय है।

सोशल मीडिया पर भी उनकी काफी सक्रियता रहती है और वे विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से जनता से सीधे जुड़े रहते हैं। वर्तमान में वे लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। एक छात्र से लेकर देश के सबसे प्रभावशाली युवा नेताओं में शामिल होने तक का उनका यह सफर बंगाल की आधुनिक राजनीति की एक अनूठी कहानी पेश करता है।

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