सुप्रीम कोर्ट। इमेज-सोशल मीडिया 
दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार और 12 राज्यों को भेजा नोटिस, क्या है पूरा मामला?

Anti Conversion Laws India: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, एमपी समेत कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार व संबंधित राज्यों को नोटिस भेजा है।

रंजन कुमार

Supreme Court News : धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर बड़ी कानूनी जंग शुरू हो गई है। आज (2 फरवरी) नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) की नई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राजस्थान व अरुणाचल प्रदेश समेत 12 राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तीन जजों की विशेष बेंच को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि इस विषय पर पहले से लंबित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुना जाए। केंद्र और सभी 12 राज्यों को अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया गया है।

अधिकारों का हनन बनाम फैसले का दायरा

NCCI की ओर से वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि कई राज्यों के कानून न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं, बल्कि बाहरी समूहों को फर्जी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। उन्होंने कानूनों के क्रियान्वयन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। दूसरी ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ये राज्य कानून सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच द्वारा पहले दिए गए फैसलों के दायरे में आते हैं। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि केंद्र का जवाब पूरी तरह तैयार है और इसे जल्द ही दाखिल कर दिया जाएगा।

किन राज्यों को मिला नोटिस?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक नोटिस की एक प्रति संबंधित राज्यों के महाधिवक्ताओं को भी अनिवार्य रूप से भेजी जाए।

नोडल वकीलों की नियुक्ति

मामले की सुनवाई को सुव्यवस्थित करने के लिए कोर्ट ने दो नोडल अधिवक्ताओं की नियुक्ति की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सृष्टि और राज्यों की ओर से अधिवक्ता रुचिरा को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो सभी दस्तावेजों और संवाद का समन्वय करेंगी। धर्मांतरण रोधी कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख आने वाले समय में देश की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की नई परिभाषा तय कर सकता है।

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