संदीप दीक्षित (फोटो- सोशल मीडिया) 
दिल्ली

संदीप दीक्षित ने सीएम रेखा गुप्ता को दी बधाई, दिल्ली को लेकर की भविष्यवाणी...कहा- बोझ तले दब जाएगी राजधानी

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने गुरुवार को दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके मंत्रिमंडल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे शहर के लिए प्रभावी ढंग से काम करेंगे।

Saurabh Pal

नई दिल्लीः कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने गुरुवार को दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके मंत्रिमंडल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे शहर के लिए प्रभावी ढंग से काम करेंगे। एएनआई से बात करते हुए, दीक्षित ने आगाह किया कि भाजपा का घोषणापत्र दिल्ली सरकार पर वित्तीय बोझ डाल सकता है।

दीक्षित ने कहा कि "उन्हें (दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता) और उनके पूरे मंत्रिमंडल को शुभकामनाएं। हमें उम्मीद है कि वे दिल्ली के लिए अच्छा काम करेंगी। भाजपा द्वारा तैयार किया गया घोषणापत्र विस्तृत है और इससे दिल्ली सरकार पर वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हम कुछ समय तक उनके काम को देखने के बाद उनके पक्ष में या उनके खिलाफ कुछ कहेंगे। हमें उम्मीद है कि वे दिल्ली के लिए अच्छा काम करेंगी।"

नई दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की पूर्व अध्यक्ष और पहली बार विधायक निर्वाचित रेखा गुप्ता गुरुवार को दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री बन गईं। राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में, ईश्वर के नाम पर शपथ ली।

रेखा गुप्ता के बाद प्रवेश वर्मा, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा, रविंद्र इंद्राज और पंकज कुमार सिंह ने नयी मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी हो गई।

पीएम मोदी सहित ये लोग शपथ के बने साक्षी

इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इनके अलावा चंद्रबाबू नायडू, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, अजीत पवार और पवन कल्याण सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस समारोह के साक्षी बने।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीट पर कब्जा कर जीत हासिल की और आम आदमी पार्टी (आप) के एक दशक लंबे शासन का अंत किया था। दिल्ली विधानसभा के लिए पांच फरवरी को चुनाव हुए थे और मतगणना आठ फरवरी को हुई थी।

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