Delhi 650 Crore Medical Equipment Scam: दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़े घोटाले की गूंज सुनाई दे रही है। इस बार मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है, जहां करीब 650 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरणों की खरीद में अनियमितता के आरोप लगे हैं। यह मामला अब इतना गंभीर हो चुका है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इसमें सीधा हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है।
राजधानी की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए हुई इस कथित खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की खबरों ने हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के अनुसार, PMO ने न केवल इस पूरे मामले की जानकारी मांगी है, बल्कि यह भी पूछा है कि इन अनियमितताओं का असर केंद्र सरकार के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) पर कितना पड़ा है। माना जा रहा है कि PMO की इस सख्ती के बाद दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इस घोटाले का मुख्य केंद्र पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें हैं। 'टीबी मुक्त भारत अभियान' को मजबूती देने के लिए दिल्ली सरकार ने कुल 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें खरीदी थीं। इन आधुनिक मशीनों का उद्देश्य कम्युनिटी स्तर पर टीबी की जल्द पहचान करना था। योजना के मुताबिक, इन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 24 टीबी सेंटरों पर तैनात किया जाना था, ताकि मोबाइल चेस्ट एक्स-रे के जरिए मरीजों की तुरंत स्क्रीनिंग हो सके।
हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ये सभी 448 मशीनें अब तक धूल फांक रही हैं और एक भी मशीन शुरू नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन मशीनों के काम न करने के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला यह कि मशीनों का इंस्टॉलेशन समय पर नहीं किया गया। दूसरा और सबसे गंभीर तकनीकी कारण परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से जरूरी मंजूरी का न मिलना है। बिना AERB की अनुमति के इन रेडिएशन वाली मशीनों का उपयोग नहीं किया जा सकता और विभाग ने यह प्रक्रिया पूरी ही नहीं की। इसके अलावा रेडियोग्राफरों की नियुक्ति को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ये मोबाइल एक्स-रे सेवाएं जल्द शुरू नहीं हुई तो टीबी के मरीजों की पहचान और उनका इलाज शुरू करने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होगी। इससे न केवल मरीजों की जान को खतरा है, बल्कि भारत सरकार के 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के लक्ष्यों को हासिल करने में भी बड़ी बाधा आ सकती है।
PMO ने इसी बात पर सबसे ज्यादा चिंता जताई है कि भ्रष्टाचार के इन आरोपों का सीधा खामियाजा आम जनता और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली सरकार PMO को भेजे जाने वाली अपनी रिपोर्ट में इन 'बंद पड़ी' मशीनों और करोड़ों के खर्च पर क्या सफाई देती है।