अमित शाह (सोर्स- सोशल मीडिया) 
दिल्ली

छात्रों पर लाठीचार्ज से गरमाई सियासत, CJP के समर्थन में उतरे वाम दल; गृह मंत्री से मांगा जवाब

Jantar Mantar Student Protest Update: दिल्ली में छात्र आंदोलन को वाम दलों का भी समर्थन मिल गया है। जंतर-मंतर पर CPI(M) और CPI सांसदों ने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए सरकार से जवाब देने की मांग की है।

अमन मौर्या

Left Parties Support CJP: देश की राजधानी में बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसको लेकर मानसून सत्र में पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस देखने को मिला और सदन स्थगित कर दिया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने पीएम आवास पर विरोध मार्च निकाला। इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत अन्य कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए। इस बीच अब वामपंथी दलों ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में सामने आ गए हैं।

छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को जंतर-मंतर पर वाम दलों के सांसद भी शामिल हुए। इसमें ए ए रहीम, CPM के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और वी सिवादासन के साथ CPI से लोकसभा सांसद अमरा राम, एस वेंकटेशन और राज्यसभा सांसद पी संदोष कुमार शामिल थे।

CPI(M) ने CJP के विरोध प्रदर्शन का किया समर्थन

CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि हम भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं। BJP न सिर्फ CJP पर, बल्कि वामपंथी पार्टियों पर भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप लगाती रही है। मुझे इस बात पर थोड़ी हैरानी होती है। हमने कभी यह नहीं छिपाया कि हम विरोध कर रहे हैं। हम इस सरकार के खिलाफ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विरोध, असहमति और मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं। यहां तक कि उच्च न्यायालयों ने भी इस बारे में कहा है, लेकिन उन्हें लगता है कि जो कोई भी विरोध कर रहा है, वह देश के खिलाफ है।

लाठीचार्ज के बाद आंदोलन ने ली नई दिशा

20 जुलाई को NEET मुद्दे पर CJP के विरोध प्रदर्शन पर सीपीआई सांसद पी संदोश कुमार ने कहा कि हम शुरू से ही इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब हम यहां आए हैं। अब, आंदोलन ने एक नई दिशा ले ली है, खासकर कल छात्रों पर हुए क्रूर लाठीचार्ज के बाद। सैकड़ों छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया। फिर भी, सरकार ने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है।

गृह मंत्री से मांगा जवाब

हमारी मांग है कि सरकार जवाब दे। गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए। बयान। यह काफी अजीब है। हमारे पास एक असंवेदनशील सरकार है। इस सरकार के पास न तो देखने के लिए आंखें हैं और न ही सुनने के लिए कान हैं, और यह केवल विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है।"

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