दिल्ली प्रदूषण पर किरण वेदी ने बताया मास्टर प्लान 
दिल्ली

'AC कमरे छोड़कर सड़क पर आओ': किरण बेदी ने अफसरों को लगाई फटकार, दिल्ली प्रदूषण पर बताया 'मास्टर प्लान'

Ex IPS ऑफिसर Kiran Bedi ने Delhi में जहरीली होती हवा को लेकर अब कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राजधानी के प्रदूषण को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करते हुए सरकारी तंत्र को आईना दिखाया है।

सौरभ शर्मा

Kiran Bedi Master Plan on Delhi Pollution: पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने दिल्ली में जहरीली होती हवा को लेकर अब कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राजधानी के प्रदूषण को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करते हुए सरकारी तंत्र को आईना दिखाया है। बेदी ने साफ शब्दों में अधिकारियों से आग्रह किया है कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर मीटिंग करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उन्हें धुंध भरी सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि शासन को रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाया जा सकता, इसके लिए धूल और धुएं के बीच खड़े होकर हालात को समझना जरूरी है।

अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए किरण बेदी ने भारत के वायु संकट को एक व्यवस्थागत विफलता बताया। उनका मानना है कि आज जो हालात हैं, वे कोई अचानक हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे सच्चे समन्वय के अभाव का नतीजा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की राजनीति बंद होनी चाहिए और ईमानदार इच्छाशक्ति के साथ समाधान निकाला जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने पूछा था कि कोर्ट आखिर कौन सी जादुई छड़ी चला सकता है।

सूट-बूट छोड़ धूल में उतरें साहब

किरण बेदी ने प्रशासन के तौर-तरीकों में आमूल-चूल बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे बेहतरीन संवेदीकरण तभी होगा जब अधिकारी रोजाना खुले आसमान के नीचे आएंगे और उसी जहरीली हवा में सांस लेंगे जिसमें आम जनता जी रही है। उन्होंने सलाह दी कि अफसरों को अपने साफ-सुथरे बाड़ों से बाहर निकलकर सड़कों पर टहलना चाहिए। जब वे जमीनी हकीकत को अपनी आंखों से देखेंगे और महसूस करेंगे, तभी उन्हें तेजी से काम करने की असली प्रेरणा मिलेगी। केवल कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठकर फैसले लेने का वक्त अब बीत चुका है, अब ऐसे प्रशासकों की जरूरत है जो रीयल टाइम में सुधार कर सकें।

प्रदूषण रोकने का 'बेदी मॉडल'

इस संकट से निपटने के लिए किरण बेदी ने एक विस्तृत कार्ययोजना भी पेश की है। उनके प्लान के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय सभी प्रमुख मंत्रालयों को एक मंच पर लाए। पर्यावरण मंत्रालय कड़े ईंधन नियम लागू करे, जबकि केंद्रीय गुणवत्ता प्रबंधन मंत्रालय एनसीआर में एक समान निर्देश सुनिश्चित करे। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को खुद प्रवर्तन का संचालन करना चाहिए। इसके अलावा, जिला मजिस्ट्रेट को रोजाना फील्ड में उतरकर नेतृत्व करना चाहिए और नगर निकायों, पुलिस व प्रदूषण बोर्ड को धूल, ट्रैफिक और कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी सख्ती से निभानी चाहिए।

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