Delhi Police at Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के हुए संसद चलो मार्च में सिर्फ छात्र ही घायल नहीं हुए थे। उनके साथ कई पुलिसकर्मी और आएएफ के जवान भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। कई पुलिसकर्मियों के सिर पर चोटें आई थी, तो कोई लहूलूहान हुआ था। ऐसे में पुलिसकर्मियों के परिवार के दिल पर भी वहीं बीती जो आम घायल छात्रों के परिवार पर बीती थी।
आज यानी शुक्रवार 30 जुलाई को जंतर-मंतर में पुलिस और छात्रों की झड़प में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार वालों ने अपना दर्द जाहिर किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन घायल पुलिसकर्मियों के परिवार वालों ने अपना आपबीती सुनाई।
दिल्ली में पुलिस और CJP प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में घायल हुए दिल्ली पुलिस के SI (सब-इंस्पेक्टर) की बेटी ने कहा, मेरे पिता दिल्ली पुलिस में SI हैं। फोर्स में शामिल होने से पहले, उन्होंने 15 साल तक इंडियन नेवी में मरीन कमांडो के तौर पर काम किया। उन्हें मुख्य प्रदर्शन स्थल पर, बैरिकेड्स के पास सबसे आगे तैनात किया गया था, जहां भारी भीड़ जमा थी। जब भी वे रात में घर लौटते, तो हमें बताते कि अब यह छात्रों का प्रदर्शन नहीं लग रहा है और इसमें कई असामाजिक तत्व घुस आए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि ठीक अगले दिन, 25 जुलाई को, जंतर-मंतर पर मंच के पास एक हिंसक भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और लगभग पीट-पीटकर मार ही डाला था। दोपहर करीब 2 बजे उन्हें RML अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे लगभग चार घंटे तक बेहोश रहे। उस रात करीब 10 बजे, मेरे पिता के साथी उन्हें घर लाए। उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी हुई थी। उन्हें उस हालत में देखना हमारे लिए बहुत दर्दनाक था।
जब हमने उनसे पूछा कि क्या हुआ था, तो उन्होंने बस इतना कहा, 'कुछ नहीं हुआ। छोटी-मोटी चोटें तो नौकरी का हिस्सा हैं।' लेकिन उनके सिर पर चार टांके लगे थे, जो छोटी-मोटी चोट तो बिल्कुल नहीं थी। वह रात हमारे परिवार के लिए बहुत मुश्किल थी। जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो देखा कि लोग मेरे पिता को अपराधी कह रहे थे। अगले दिन मुझे पता चला कि जिन लोगों ने मेरे पिता पर हमला किया था, वे खुद राहत पाने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे।
इस बात से मुझे बहुत दुख हुआ। मुझे लगा कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय की मांग करनी चाहिए। पुलिस के दूसरे परिवारों ने भी हमारा साथ दिया। हम सुप्रीम कोर्ट गए और अपने वकील से सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारा पक्ष रखने का अनुरोध किया। हमें भरोसा दिलाया गया कि इस देश के नागरिक के तौर पर हमारे भी बराबर अधिकार हैं और हमें भी न्याय मिलेगा।
दिल्ली में 20 जुलाई को पुलिस और CJP प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक ACP की पत्नी ने भी अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया, कि "जब वे 20 जुलाई की देर रात घायल हालत में घर लौटे, तो वह मेरे और मेरी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक और सदमे वाला पल था। आज मैं यहां दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों के परिवार वालों के साथ हूं और हम अपनी आपबीती आप सभी के साथ साझा करना चाहते हैं।"
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दिल्ली में 20 जुलाई को पुलिस और सीजेपी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में घायल हुए ASI की पत्नी सीमा ने प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और असामाजिक तत्वों को सजा दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा, "जिन उपद्रवियों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में बाधा डालने, उसकी छवि खराब करने और संसद की गरिमा को कम करने की कोशिश की, उन्हें उनके कामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और बख्शा नहीं जाना चाहिए। साथ ही, छात्रों के रिकॉर्ड की जांच के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाना चाहिए।"
आपको जानकारी दें, कि 20 जुलाई वहीं दिन था, जिस दिन नीट पेपर लीक मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ कॉकरोच जनता पार्टी और उनके समर्थकों ने संसद चलो मार्च किया था। इस मार्च के दौरान वहां दिल्ली पुलिस, आरएएफ जवान और छात्रों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। छात्रों के शांतिपूर्वक प्रदर्शन में शामिल हुए असामाजित तत्वों ने हिंसा की शुरुआत की, जिससे हालात बेकाबू हो गए और हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी और छात्र घायल हो गए थे।