Rice Scam CBI: दिल्ली में सीबीआई ने रियायती अनाज के वितरण से जुड़े कथित 28.87 करोड़ के चावल के गबन रैकेट के सिलसिले में एफसीआई और उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एजेंसी ने सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यापारियों के बीच सरकारी योजनाओं के उल्लंघन में रियायती दरों पर चावल प्राप्त करने के लिए आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है। यह मामला एफसीआई के दिल्ली क्षेत्र द्वारा 13 अप्रैल से 15 मई, 2026 के बीच नेरामैक को आवंटित 62,000 मीट्रिक टन चावल से संबंधित है।
एफआईआर के अनुसार, इस मात्रा में से लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल ही वास्तव में जारी किया गया था। सीबीआई का आरोप है कि रियायती अनाज जिन जरूरतमंद समूहों के लिए था, उन तक चावल पहुंचाने की बजाय व्यापारियों ने एफसीआई डिपो से चावल चुरा लिया।
1. कुन्हीरामन पद्मिनी आशा, FCI की पूर्व GM)
2. ब्रह्म प्रकाश, FCI के एजीएम (सेल्स)
3. अमरेंद्र विक्रम, FCI के मैनेजर (सेल्स)
4. भास्कर बरुआ, पूर्व MD, नेरामैक
5. अंजल कुमार दता, पूर्व अपर GM, नेरामैक
6. दिलीप साहा, पूर्व डिप्टी मैनेजर, नेरामैक
7. राजेश बजाज, उत्पालक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स और दिवेश कमर्शियल्स के निदेशक
8. पंकज सराफ, सुपर ग्रेस के पार्टनर
दिल्ली की राजनीति में चावल घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने CBI की ओर से दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए हैं। 'AAP' दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए आवंटित करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल गलत तरीके से दूसरी जगह भेज दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार के करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से जुड़ी यह दूसरी एफआईआर है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले दवा घोटाले को लेकर मामला सामने आया था और अब कथित चावल घोटाले में सीबीआई ने 27 अगस्त 2026 को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
पत्र में दावा किया गया था कि यह चावल दिल्ली में रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों, लेबर क्लास, प्रवासी श्रमिकों और उन लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कवर नहीं होते हैं। सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि यह पत्र कई महीने बाद, 8 अप्रैल 2026 को आगे भेजा गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री ने पत्र अपने विभाग के कमिश्नर को भेजने के बजाय एडिशनल कमिश्नर को क्यों भेजा। इसके बाद एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा ने एफसीआई के महाप्रबंधक को ई-मेल भेजकर चावल के आवंटन और आपूर्ति की सुविधा देने का अनुरोध किया और एनओसी भी जारी की।
भारद्वाज ने कहा कि मामला केवल पत्र को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार, एफसीआई को चावल उपलब्ध कराने के लिए बाकायदा अनुरोध, प्राधिकरण और एनओसी भेजी गई। इसके बाद 4 मई 2026 को नेरमैक की ओर से मंत्री को दोबारा पत्र भेजकर बताया गया कि उसे 31,000 मीट्रिक टन चावल मिल चुका है और अतिरिक्त 31,000 मीट्रिक टन चावल की मांग की गई।
आरोप है कि इस पत्र को भी मंत्री की ओर से एडिशनल कमिश्नर को भेजा गया और फिर एफसीआई से चावल उपलब्ध कराने के लिए दोबारा पत्राचार किया गया। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल घोटाला का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि यदि यह चावल वास्तव में दिल्ली के गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए था तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इसे कहां और किसे वितरित किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि चावल वितरण के संबंध में न तो कोई सार्वजनिक जानकारी दी गई और न ही सरकार की ओर से वितरण कार्यक्रम का प्रचार किया गया। 'AAP' नेता ने विशेष रूप से एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा के कारण बताओ नोटिस के जवाब का हवाला दिया। भारद्वाज ने कहा कि यदि अधिकारी का यह जवाब सही है तो सीबीआई को मंत्री की भूमिका की भी विस्तृत जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल अधिकारियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भूमिका सामने आनी चाहिए जिन्होंने चावल के आवंटन और आपूर्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दूसरी बार मंत्री को जानकारी दी गई कि 31,000 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया जा चुका है, तो उन्होंने यह जानकारी क्यों नहीं मांगी कि चावल दिल्ली में कहां और किन लाभार्थियों को वितरित किया गया।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों के नाम पर आवंटित चावल की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। 'AAP' प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार कमिश्नर विभाग का प्रमुख होता है और एडिशनल कमिश्नर के पास इस तरह की एनओसी या प्राधिकरण जारी करने की शक्ति नहीं थी। ऐसे में बिना उचित फाइल प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के एफसीआई को पत्र भेजे जाने की जांच जरूरी है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मामले में सीबीआई से निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग करती है। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चावल आवंटन का प्रस्ताव किसने तैयार किया, किसके निर्देश पर पत्राचार हुआ, एफसीआई से चावल किसे मिला और अंततः यह चावल कहां पहुंचा। - एजेंसी इनपुट के साथ