मां चंद्रहासिनी मंदिर में नवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह।
संतान प्राप्ति की कामना लेकर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु।
प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल।
महानदी के तट पर स्थित माता का दरबार।
Chhattisgarh Maa Chandrahasini Devi Temple: शक्ति की आराधना और आस्था के महापर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के देवी मंदिरों में भक्तिमय माहौल नजर आने लगा है। कहीं मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं, तो कहीं श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। सक्ती जिले के चंद्रपुर में महानदी के पावन तट पर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर में भी नवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह है। यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। खास बात यह है कि यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां दुर्गा के 52 शक्तिपीठों में से एक स्वरूप मां चंद्रहासिनी के रूप में विराजित है। पहले यहां बलि प्रथा का प्रचलन था लेकिन समय के साथ इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मां चंद्रहासिनी के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। महानदी के तट पर स्थित यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। नवरात्रि के दौरान भक्त मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों और मां के जयकारों के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।
मां चंद्रहासिनी के दरबार से जुड़ी मान्यताओं के चलते संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। भक्त मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि के दौरान इस आस्था का विशेष महत्व दिखाई देता है। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल दर्शन का स्थल नहीं, बल्कि विश्वास और आध्यात्मिक शांति का केंद्र भी है।
नवरात्रि भारतीय संस्कृति और शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण पर्व है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु उपवास, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए मां दुर्गा की आराधना करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न देवी मंदिरों में भी नवरात्रि को लेकर उत्साह का माहौल है। चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। महानदी के पावन तट पर स्थित मां चंद्रहासिनी का यह दरबार नवरात्रि के दौरान आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।
चंद्रमा के आकार की विशेषताओं के कारण उन्हें चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी मां के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि चंद्रसेनी देवी ने सरगुजा को छोड़ दिया और उदयपुर और रायगढ़ होते हुए महानदी के किनारे चंद्रपुर की यात्रा की। महानदी की पवित्र शीतल धारा से प्रभावित होकर माता रानी विश्राम करने लगीं। इसके बाद उन्हें नींद आ गई। वर्षों व्यतीत हो जाने पर भी उनकी नींद नहीं खुली। एक बार संबलपुर के राजा की सवारी यहां से गुजरी। चंद्रसेनी देवी पर गलती से उनके पैर लग जाने से चोट लग गई, जिससे वे जाग गए। फिर एक दिन देवी ने उन्हें एक सपने में दर्शन दिए और उन्हें एक मंदिर बनाने और वहां एक मूर्ति स्थापित करने के लिए कहा। हर साल चैत्र नवरात्रि के अवसर पर सिद्ध शक्तिपीठ मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर चंद्रपुर में महाआरती के साथ 108 दीपों की पूजा की जाती है।