राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ‘सेवा सम्मान पर्व’ कार्यक्रम में हुईं शामिल।
नक्सलवाद के मुद्दे पर भी राष्ट्रपति ने किया संबोधन।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने का दिया मंत्र।
देश के विकास में सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भूमिका पर दिया जोर।
President Droupadi Murmu Raipur Visit: दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे में पहुंचे देश की प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू ने संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की सराहना करते हुए रायपुर में आयोजित नुआखाई महोत्सव के अवसर पर छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया का संदेश दिया। सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से लेकर युवाओं की भूमिका, महिला सशक्तीकरण और प्रदेश में बदलते हालात पर अपनी बात रखी।
राष्ट्रपति ने कहा कि नुआखाई केवल एक पर्व नहीं बल्कि हमारी परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय जीवन-मूल्यों को पहुंचाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अन्न केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हर युवा के भीतर कुछ नया करने और अपनी पहचान बनाने की ललक होनी चाहिए। युवाओं को अपने व्यक्तिगत प्रयासों को समाज और राष्ट्र के लक्ष्यों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और नैतिकता को सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। राष्ट्रपति के मुताबिक विकसित भारत का निर्माण केवल बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने में महिलाओं की समान भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने पुरुषों खासकर युवाओं से अपील की कि वे अपनी बहनों और बेटियों को आगे बढ़ने तथा अपने सपने पूरे करने के लिए अनुकूल माहौल दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार और सोच में भी दिखाई देना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में बदलाव का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रदेश के युवा नक्सलवाद के भटकाव से निकलकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। जहां कभी आतंक का अंधेरा था वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से युवाओं और उनके परिवारों के साथ-साथ प्रदेश तथा देश के विकास को भी गति मिल रही है।
राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट रहा छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी संस्कृति, मेहनतकश किसानों, जागरूक युवाओं और सशक्त महिलाओं से है। इन मूल्यों को मजबूत करके ही विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है।