छत्तीसगढ़ में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश के आसार।
तूफान को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी।
मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में हुई बैठक।
सभी जिलों के कलेक्टर को किया अलर्ट।
Cyclonic Storm Arnab In Chhattisgarh: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर छत्तीसगढ़ में भी दिखेगा। संभावित खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट किया है। वहीं प्रशासन ने भी तूफान को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसे लेकर मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में चक्रवात के मद्देनजर 27 से 29 अक्टूबर तक आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी जुड़े।
अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने बताया कि राज्य प्रशासन संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। विशेष रूप से दक्षिण बस्तर क्षेत्र में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जिसे ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को सतर्क कर दिया गया है। मौसम विभाग के अनुमान के बाद बस्तर संभाग में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार चक्रवात अर्नब बंगाल की खाड़ी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, यह 27 अक्टूबर तक तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। इस दौरान 140 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चक्रवाती तूफान के पहुंचने के संकेत है।
आपदा से निपटने के लिए तैयारियों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि SDRF की 7 टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ तैनात कर दी गई हैं। NDRF और होमगार्ड की टीमों को भी आपातकालीन स्थिति के लिए अलर्ट पर रखा गया है। संभावित प्रभावित इलाकों में राहत शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं, खाद्य सामग्री, परिवहन और संचार व्यवस्था से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आवश्यकता पड़ने पर आम नागरिकों को सुरक्षित स्थानों (शेल्टर होम) पर पहुंचाने की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
किसानों को फसलों से संबंधित विस्तृत एडवाइजरी जारी करने तथा चक्रवात से फसलों और पशुधन को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्रों के छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय परिस्थितियों का आकलन कर सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।