खसरा रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण में लापरवाही उजागर।
नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद हुई कार्रवाई।
सरकारी जमीन को दूसरे किसान के नाम चढ़ाई।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एक साथ पांच पटवारियों को कलेक्टर ने सस्पेंड किया है। सरकारी जमीन को दूसरे किसान के नाम दर्ज करने, खसरा रिकॉर्ड में गड़बड़ी और डिजिटल फसल सर्वेक्षण में लापरवाही उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की समीक्षा बैठक के बाद संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) ने पांचों पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर निलंबन के आदेश जारी किए गए।
कलेक्टर कार्यालय के आदेश के अनुसार, पटवारियों की लापरवाही को कदाचरण और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (1)(क) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। अब समय-सीमा के भीतर सर्वे पूरा कराने और राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ियों को रोकने की जिम्मेदारी प्रशासन के सामने है।
पटवारियों में सरायपाली तहसील के जितेंद्र सिंह बाघ, महासमुंद तहसील के हरीश चंद्राकर, बसना तहसील के उदय प्रकाश राजपूत, बागबाहरा तहसील के कंचन साहू और लुकेश यादव शामिल हैं। निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय संबंधित तहसील कार्यालय रहेगा और नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। सरायपाली तहसील के ग्राम पड़कीपाली में पदस्थ पटवारी जितेंद्र सिंह बाघ पर आरोप है कि उन्होंने शासकीय जमीन को पटवारी अभिलेख में दूसरे किसान के नाम दर्ज कर दिया। इसे पद के दुरुपयोग का मामला माना गया है। वहीं, महासमुंद तहसील के ग्राम बड़गांव के पटवारी हरीश चंद्राकर पर खसरा नंबर की वास्तविक स्थिति छिपाने और जमीन का दोहरा नामांतरण करने का आरोप है।