बिलासपुर ट्रेन हादसा (सोर्स - नवभारत लाइव)
बिलासपुर

14 मौतें, 365 दिन का इंतजार! बिलासपुर के लालखदान रेल हादसे की अंतिम रिपोर्ट अब भी गायब

Bilaspur Train Accident Update: 4 नवंबर 2025 को मेमू ट्रेन और पहले से खड़ी मालगाड़ी के बीच हुई जोरदार टक्कर में लोको पायलट समेत 14 लोगों की मौत हो गई थी।

घनश्याम गंधर्व, चंदू निर्मलकर

Highlights

  • बिलासपुर ट्रेन हादसे के एक साल बाद भी नहीं आई अंतिम रिपोर्ट।

  • 4 नवंबर 2025 को मेमू ट्रेन और मालगाड़ी में हुई थी जोरदार टक्कर।

  • लोको पायलट समेत 14 लोगों की हुई थी मौत।

  • लालखदान में हुए भीषण मेमू रेल हादसे का जिम्मेदार कौन।

Bilaspur Memu Train Accident Update: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित लालखदान में हुए भीषण मेमू रेल हादसे को एक साल बीत चुका है, लेकिन इस दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। 4 नवंबर 2025 को मेमू ट्रेन और पहले से खड़ी मालगाड़ी के बीच हुई जोरदार टक्कर में लोको पायलट समेत 14 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद रेलवे ने जांच शुरू की, जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की और रेल सुरक्षा को मजबूत करने के कई दावे भी किए। इसके बावजूद एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल कायम है कि आखिर इस हादसे के लिए अंतिम रूप से कौन जिम्मेदार था?

180 दिन की जांच, एक साल बाद भी अंतिम रिपोर्ट नहीं

हादसे के दो दिन बाद यानी 6 नवंबर 2025 को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ने दुर्घटना की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान 19 रेल कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। शुरुआती जांच में सिग्नल ओवरशूट यानी लाल सिग्नल पार करना दुर्घटना की प्रमुख वजह के रूप में सामने आया।

इसके बाद रेलवे ने कार्रवाई करते हुए 17 नवंबर को सीनियर डीओपी को फोर्स लीव पर भेजा। 11 दिसंबर को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। वहीं सहायक लोको पायलट रश्मि राज पाल को भी निलंबित किया गया, जिन्हें बाद में 12 सितंबर 2026 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

शुरुआती स्तर पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन CRS की अंतिम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में दुर्घटना के वास्तविक कारणों, तकनीकी खामियों और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

26 इंजन अब भी कवच से बाहर, 2380 रूट किलोमीटर में काम बाकी

लालखदान हादसे के बाद रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने की बात कही थी। इनमें कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को सबसे अहम माना जा रहा है। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि 26 इंजन अब भी कवच से लैस नहीं हो पाए हैं।

बिलासपुर रेल मंडल के कुल 2430 रूट किलोमीटर में से करीब 2380 किलोमीटर में कवच लगाने का काम बाकी बताया जा रहा है। बिलासपुर-चांपा रेलखंड को प्राथमिकता में रखने के बावजूद अब तक केवल 50 किलोमीटर हिस्से में ट्रायल और टेस्टिंग पूरी हो सकी है। इसके अलावा ऑटो सिग्नलिंग और अन्य सुरक्षा उपायों पर भी काम जारी है। रेलवे का दावा है कि सुरक्षा से जुड़े काम जल्द पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन हादसे के एक साल बाद भी अधूरी तैयारियां सवाल खड़े कर रही हैं।

14 मौतों के बाद भी सबसे बड़ा सवाल बरकरार

लालखदान रेल हादसे ने 14 परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। दुर्घटना के बाद कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, जांच शुरू हुई और सुरक्षा सुधारों का भरोसा दिया गया। लेकिन एक साल बाद भी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।

अब सवाल यह है कि CRS की अंतिम रिपोर्ट कब आएगी? हादसे के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय होगी? रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में जो खामियां सामने आईं, उन्हें पूरी तरह कब दूर किया जाएगा? क्योंकि हादसे के बाद सिर्फ कार्रवाई और दावे काफी नहीं हैं, जरूरी है कि जांच के निष्कर्ष सामने आएं और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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