बस्तर में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कई छिपे हुए पर्यटन स्थल मौजूद हैं।
यहां मटनार हिल्स, तामड़ाघुमर और शिवगंगा जलप्रपात जैसे खूबसूरत क्षेत्र हैं।
पर्यटन सहायता केंद्र न होने से पर्यटकों को काफी परेशानी हो रही है।
बाहर से आने वाले पर्यटक रास्ता भटक रहे हैं या वापस लौट रहे हैं।
स्थानीय युवा और होम स्टे संचालक ही पर्यटकों की मदद कर रहे हैं।
Bastar Tourism Hidden Pots Guide : बस्तर में पर्यटन सीजन के दौरान काफी लोग आते हैं। यहां जगदलपुर पहुंचने पर प्रमुख स्थलों की जानकारी मिल जाती है। लेकिन आसपास के छिपे हुए स्थलों की जानकारी नहीं मिलती। तामड़ाघुमर और मिचनार जाने के रास्ते आसानी से नहीं मिलते। दूरी और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिलना भी बहुत मुश्किल है। इस वजह से पर्यटक अक्सर मुख्य स्थलों से ही लौट जाते हैं।
पर्यटकों की इस मुश्किल में स्थानीय युवा ही सहारा बने हैं। होम स्टे संचालक और स्थानीय गाइड खुद पर्यटकों की मदद करते हैं। वे पर्यटकों को सही रास्ता और दूरियों के बारे में बताते हैं। वे बस्तर की संस्कृति और जीवनशैली से भी रूबरू कराते हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन व्यक्तिगत प्रयासों की भी अपनी एक सीमा होती है।
बस्तर जैसे बड़े क्षेत्र में सरकारी सहयोग बेहद जरूरी है। प्रशासन और पर्यटन विभाग को मिलकर काम करना होगा। स्थानीय युवाओं को सही प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
जगदलपुर में एक व्यवस्थित पर्यटन सहायता केंद्र होना चाहिए। इससे पर्यटकों को एक ही जगह पूरी जानकारी मिल सकेगी। सटीक रूट मैप मिलने से यात्रा काफी आसान हो जाएगी।
बस्तर के गांवों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। पर्यटन मंत्रालय ने धुड़मारास को एडवेंचर टूरिज्म में चुना था। चित्रकोट को कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म श्रेणी में पुरस्कार मिला।
यह सम्मान साल 2024 की सर्वश्रेष्ठ गांव प्रतियोगिता में मिला। इससे साफ है कि स्थानीय समुदाय में अपार क्षमता है। अब इस पहचान को मजबूत व्यवस्था में बदलना जरूरी है।