बस्तर दशहरा का भव्य आयोजन हाल ही में पूरा हुआ है।
आयोजन के बाद परंपराओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
सांसद महेश कश्यप ने परंपरा में व्यवधान पर सख्त चेतावनी दी।
कुमार जयदेव ने दशहरा समिति की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने पूजा-पाठ के लिए अलग समिति गठित करने की मांग की।
Bastar Dussehra Rituals Controversy : बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा पर्व संपन्न हो चुका है। आयोजन के बाद अब बयानों का घमासान शुरू हो गया है। सांसद महेश कश्यप ने परंपरा में विघ्न डालने वालों को चेतावनी दी है। दूसरी तरफ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के भाई कुमार जयदेव ने सवाल उठाए हैं। कुमार जयदेव बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के संरक्षक हैं। उन्होंने सीधे सांसद और दशहरा समिति की भूमिका पर उंगली उठाई है।
सांसद महेश कश्यप बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने प्रेस वार्ता में आयोजन को भव्य और सफल बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा 600 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत है। यह किसी एक समाज या राजनीतिक दल का पर्व नहीं है। सांसद ने कहा कि कुछ लोग ग्रामीणों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कुमार जयदेव ने सांसद के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पूछा कि क्या सांसद को पारंपरिक विधानों की जानकारी है? जयदेव ने पूछा कि क्या सांसद खोटला और ठूरली जात्रा को जानते हैं? उन्होंने दान और बकरे की बलि की व्यवस्था पर सवाल किए। आरोप है कि रथ बनाने वाले ग्रामीणों को बिना दान दिए लौटाया गया। जोगी को भी बिना उचित सम्मान के विदा कर दिया गया।
जयदेव ने कहा कि जिला प्रशासन को पारंपरिक विधानों का ज्ञान नहीं है। भव्यता के चक्कर में जरूरी रस्में अनदेखी का शिकार हो रही हैं। उन्होंने पूजा-पाठ के संचालन के लिए अलग समिति बनाने की मांग की। इस समिति में जानकार और स्थानीय लोगों को शामिल करने को कहा। उनका मानना है कि इससे धार्मिक परंपराएं सही ढंग से निभाई जा सकेंगी।
इस विवाद से आयोजन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ परंपरा की रक्षा का दावा किया जा रहा है। दूसरी तरफ रस्मों के सही पालन न होने का आरोप है। दोनों पक्ष बस्तर की परंपरा को लेकर चिंतित दिखाई देते हैं। अब देखना होगा कि दशहरा समिति इन आरोपों पर क्या सफाई देती है। बस्तर के लोग इस विवाद के सुलझने का इंतजार कर रहे हैं।