IAS Nationality Eligibility Criteria: UPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर प्रतियोगी अभ्यर्थियों के बीच सबसे आम सवालों में से एक यह है कि क्या नेपाल, भूटान या पाकिस्तान से आए नागरिक भारत में IAS, IPS या अन्य केंद्रीय सेवाओं की परीक्षा दे सकते हैं। इस विषय को लेकर लोगों के मन में अक्सर भ्रम बना रहता है, जबकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राष्ट्रीयता से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से तय किए हैं।
दरअसल, IAS, IPS और IFS जैसी शीर्ष सेवाओं के लिए केवल भारतीय नागरिक ही पात्र होते हैं, जबकि नेपाल और भूटान के नागरिक कुछ अन्य ग्रुप ‘A’ और ग्रुप ‘B’ सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान से आए भारतीय मूल के लोगों और नागरिकता प्राप्त शरणार्थियों के लिए भी अलग प्रावधान हैं। आइए समझते हैं कि किसे कौन-सी सेवा के लिए पात्रता मिलती है और एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट की क्या भूमिका है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के जरिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस समेत कई ग्रुप ‘A’ और ग्रुप ‘B’ सेवाओं में भर्ती करता है। हालांकि, सभी सेवाओं के लिए नागरिकता के नियम एक जैसे नहीं हैं।
केवल भारतीय नागरिक ही पात्र: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के लिए भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
नेपाल, भूटान और पाकिस्तान के नागरिक: यदि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो वे सीधे IAS, IPS या IFS के लिए पात्र नहीं माने जाते।
नागरिकता कैसे भी मिली हो, पात्रता बनी रहती है: जन्म, पंजीकरण या प्राकृतिककरण (Naturalisation) के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाला व्यक्ति इन तीनों शीर्ष सेवाओं के लिए आवेदन कर सकता है।
गौरतलब है कि जहां एक तरफ पाकिस्तान का कोई भी नागरिक UPSC CSE परीक्षा नहीं दे सकते वहीं नेपाल और भूटीन के उम्मीदवारों को कुछ सेवाओं में छूट दी गई है।
ग्रुप ‘A’ और ‘B’ सेवाओं में अवसर: नेपाल और भूटान के नागरिक UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
किन सेवाओं के लिए पात्र: वे भारतीय राजस्व सेवा (IRS), भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा (IAAS), रेलवे और अन्य केंद्रीय ग्रुप ‘A’ व ‘B’ सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट अनिवार्य: अंतिम नियुक्ति से पहले गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी Certificate of Eligibility जमा करना जरूरी होता है।
PIO उम्मीदवार: पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, केन्या, युगांडा या तंजानिया से भारत में स्थायी रूप से बसने आए भारतीय मूल के लोग IAS, IPS और IFS को छोड़कर अन्य UPSC सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नागरिकता मिलने पर पात्रता: यदि पाकिस्तान से आए किसी शरणार्थी को भारत की नागरिकता मिल जाती है, तो वह नागरिक बनने के बाद IAS, IPS और IFS के लिए भी पात्र हो जाता है।
तिब्बती शरणार्थी: 1 जनवरी 1962 से पहले भारत आकर स्थायी रूप से बसे तिब्बती शरणार्थी भी निर्धारित शर्तों के तहत गैर-IAS/IPS सेवाओं के लिए योग्य हैं।
गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूरी: नेपाल, भूटान और अन्य पात्र विदेशी मूल के उम्मीदवार UPSC परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन अंतिम नियुक्ति से पहले गृह मंत्रालय (MHA) उनके बैकग्राउंड की जांच कर Certificate of Eligibility जारी करता है।
प्रीलिम्स के बाद शुरू करें प्रक्रिया: विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रीलिम्स परीक्षा पास करते ही गृह मंत्रालय और संबंधित सरकारी वेबसाइट पर जाकर एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट की कागजी प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए।