नालंदा विश्वविद्यालय को ISRO के IIRS का नोडल सेंटर बनाया गया है सोर्स-IANS
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ISRO Course: नालंदा विश्वविद्यालय बना ISRO के IIRS का नोडल सेंटर, छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोर्स का मौका

Nalanda University ISRO Course: नालंदा विश्वविद्यालय को ISRO के IIRS का नोडल सेंटर बनाया गया है। छात्र रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और GIS जैसे विषयों में मुफ्त ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे।

करुणा नंद शाहवाल

Highlights:

  • नालंदा विश्वविद्यालय को ISRO के IIRS का नोडल सेंटर नामित किया गया।

  • विश्वविद्यालय के सभी विभागों के छात्र मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे।

  • कोर्स में रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और GIS जैसे विषय शामिल होंगे।

Nalanda University GIS Online Course: बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक की दुनिया से जुड़ने का नया अवसर सामने आया है। विश्वविद्यालय को इसरो के भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) का नोडल सेंटर नामित किया गया है।

इसके तहत छात्र बिना कोई फीस दिए रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और GIS जैसे विषयों में ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। खास बात यह है कि इस पहल का लाभ किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे। जानिए, इस कार्यक्रम में क्या सीखने का मौका मिलेगा और कोर्स से जुड़ी जानकारी कहां मिलेगी।

नालंदा विश्वविद्यालय बना IIRS-ISRO का नोडल सेंटर

बिहार के नालंदा जिले में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) का नोडल सेंटर बनाया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस बयान में इसकी जानकारी दी गई।

मुफ्त में मिलेगा ऑनलाइन कोर्स करने का मौका

इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को IIRS-ISRO के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (DLP) से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है।

रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और GIS की पढ़ाई

इन पाठ्यक्रमों में रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसे विषय शामिल हैं। इनके जरिए छात्र पृथ्वी के संसाधनों का आकलन, भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे।

सभी विभागों के विद्यार्थी कर सकेंगे आवेदन

इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए छात्रों का किसी विशेष विभाग से होना जरूरी नहीं है। विश्वविद्यालय के सभी विभागों में पढ़ने वाले विद्यार्थी उपलब्ध पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे अलग-अलग शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नई तकनीकी दक्षताएं सीखने का अवसर मिलेगा।

ई-क्लास प्लेटफॉर्म पर होंगी ऑनलाइन कक्षाएं

विद्यार्थियों को इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही पढ़ाई के लिए जरूरी अध्ययन सामग्री भी दी जाएगी। कोर्स की अवधि, उपलब्ध विषयों और समय-सारिणी की जानकारी वर्ष 2026 के आधिकारिक IIRS-ISRO कोर्स कैलेंडर में देखी जा सकती है।

आवेदन और समन्वय से जुड़ी जानकारी कहां मिलेगी?

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को पंजीकरण की स्वीकृति और अन्य जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क करना होगा। उन्हें इस कार्यक्रम का समन्वयक नामित किया गया है।

इस पहल से छात्रों को क्या फायदा होगा?

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस साझेदारी से विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ उन्नत तकनीकी ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे उनके कौशल विकास और शोध क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, इसरो के शैक्षणिक कार्यक्रम से जुड़कर छात्र अंतरिक्ष विज्ञान और भू-स्थानिक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी समझ विकसित कर सकेंगे।

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