Highlights:
IELTS और TOEFL अंग्रेजी भाषा की जानकारी जांचने वाले प्रमुख टेस्ट हैं।
SAT अंडरग्रेजुएट एडमिशन, जबकि GRE और GMAT कुछ पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
परीक्षा चुनने से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक शर्तें जरूर जांचें।
Foreign University Admission Kaise Milega: विदेश में पढ़ने का सपना है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वहां एडमिशन का रास्ता क्या है। कई छात्र मानते हैं कि अच्छे नंबरों के दम पर विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल जाएगा, लेकिन कई संस्थानों में कुछ परीक्षाओं के स्कोर भी मांगे जाते हैं।
मसलन, अंग्रेजी भाषा की जानकारी साबित करने के लिए IELTS या TOEFL देना पड़ सकता है, जबकि ग्रेजुएशन, मास्टर्स, MBA और मेडिकल जैसे कोर्स के लिए अलग-अलग टेस्ट काम आते हैं। हालांकि, हर देश और यूनिवर्सिटी के नियम अलग होते हैं। इसलिए आवेदन की तैयारी शुरू करने से पहले यह जान लेना बेहतर है कि आपके चुने हुए कोर्स के लिए कौन-सी परीक्षा जरूरी है।
अगर आप ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद विदेश में मास्टर्स या किसी रिसर्च प्रोग्राम में दाखिला लेना चाहते हैं, तो GRE आपके लिए उपयोगी हो सकता है। कई विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग, साइंस, टेक्नोलॉजी और दूसरे विषयों के ग्रेजुएट प्रोग्राम में इस स्कोर को स्वीकार करते हैं।
GRE में मुख्य रूप से Verbal Reasoning, Quantitative Reasoning और Analytical Writing की जांच होती है। इससे विश्वविद्यालयों को उम्मीदवार की भाषा समझने, गणितीय तर्क लगाने और विश्लेषण करने की क्षमता का अंदाजा मिलता है। ध्यान रखें कि हर कोर्स या यूनिवर्सिटी में GRE अनिवार्य नहीं है।
अगर आप ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ाई करने की सोच रहे हैं, तो IELTS और TOEFL के नाम जरूर सुने होंगे। ये दोनों अंग्रेजी भाषा की जानकारी जांचने वाली परीक्षाएं हैं। इनमें आपकी Reading, Writing, Listening और Speaking स्किल को परखा जाता है।
कई विदेशी यूनिवर्सिटियां एडमिशन के दौरान इन परीक्षाओं का स्कोर मांगती हैं, ताकि यह पता चल सके कि आप अंग्रेजी में पढ़ाई और बातचीत कर पाएंगे या नहीं। हालांकि, हर यूनिवर्सिटी में इनकी जरूरत एक जैसी नहीं होती।
अगर आपने 12वीं पास कर ली है और विदेश की किसी यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री करना चाहते हैं, तो SAT आपके काम का एग्जाम हो सकता है। यह परीक्षा खास तौर पर अमेरिका में अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए जानी जाती है।
SAT में गणित और अंग्रेजी से जुड़ी पढ़ने-लिखने की क्षमताओं को जांचा जाता है। कई विश्वविद्यालय इसके स्कोर को एडमिशन प्रक्रिया में शामिल करते हैं। हालांकि, सभी संस्थानों में SAT देना जरूरी नहीं है। कुछ यूनिवर्सिटियां टेस्ट-ऑप्शनल पॉलिसी के तहत इसके बिना भी आवेदन स्वीकार करती हैं। इसलिए जिस कॉलेज में दाखिला लेना है, उसकी शर्तें पहले देख लें।
विदेश के किसी बिजनेस स्कूल से MBA करना चाहते हैं, तो GMAT एक अहम परीक्षा हो सकती है। कई बिजनेस स्कूल एडमिशन के दौरान इसके स्कोर पर विचार करते हैं। इस टेस्ट में डेटा का विश्लेषण करने, गणितीय सवाल हल करने और तार्किक तरीके से सोचने की क्षमता जांची जाती है।
हालांकि, सभी बिजनेस स्कूल GMAT को अनिवार्य नहीं करते। कुछ संस्थान GRE का स्कोर भी स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ दूसरे विकल्प देते हैं। इसलिए परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले अपने पसंदीदा बिजनेस स्कूल की एडमिशन पॉलिसी देख लें।
अंग्रेजी की जानकारी साबित करने के लिए अब सिर्फ IELTS और TOEFL ही विकल्प नहीं हैं। कई विदेशी यूनिवर्सिटियां PTE Academic और Duolingo English Test के स्कोर भी स्वीकार करती हैं।
इन परीक्षाओं का फायदा यह है कि कुछ छात्रों को अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से टेस्ट चुनने का विकल्प मिल जाता है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है- हर यूनिवर्सिटी और हर कोर्स में सभी टेस्ट स्वीकार नहीं किए जाते। इसलिए परीक्षा बुक करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर यह जरूर देख लें कि आपके चुने हुए संस्थान में कौन-सा स्कोर मान्य है।
विदेश में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए SAT के अलावा कुछ दूसरे टेस्ट भी काम आ सकते हैं। ACT (American College Testing) अमेरिका की कई यूनिवर्सिटियों में अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए स्वीकार किया जाता है।
वहीं, AP (Advanced Placement) परीक्षाओं के स्कोर कुछ संस्थानों में एडमिशन या कॉलेज क्रेडिट के लिए उपयोगी हो सकते हैं। अगर आप इटली में पढ़ाई करना चाहते हैं, तो कुछ विश्वविद्यालयों और कोर्स में TOLC (Test Online CISIA) परीक्षा की जरूरत पड़ सकती है। ध्यान रखें कि इन सभी परीक्षाओं की जरूरत हर यूनिवर्सिटी में नहीं होती। इसलिए आवेदन से पहले कोर्स की आधिकारिक एडमिशन गाइडलाइन पढ़ना जरूरी है।
विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करते समय केवल एंट्रेंस एग्जाम पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपको यूनिवर्सिटी की दूसरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
कोर्स और यूनिवर्सिटी चुनें: पहले तय करें कि किस देश में और कौन-सा कोर्स पढ़ना है।
परीक्षा की जरूरत जांचें: देखें कि संबंधित यूनिवर्सिटी IELTS, TOEFL, SAT, GRE या GMAT में से किस स्कोर की मांग करती है।
स्कोर की शर्त समझें: केवल परीक्षा देना काफी नहीं होता। कई संस्थानों में न्यूनतम स्कोर की शर्त भी होती है।
डेडलाइन का ध्यान रखें: परीक्षा देने, रिजल्ट आने और आवेदन जमा करने के लिए पर्याप्त समय रखें।
दस्तावेज तैयार रखें: मार्कशीट, ट्रांसक्रिप्ट, पासपोर्ट, स्टेटमेंट ऑफ पर्पज और सिफारिश पत्र जैसे दस्तावेज कोर्स के अनुसार मांगे जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, विदेश में पढ़ाई के लिए हर छात्र को एक ही परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती। सही एग्जाम का चुनाव आपके कोर्स, देश और यूनिवर्सिटी पर निर्भर करता है। इसलिए तैयारी शुरू करने से पहले एडमिशन की आधिकारिक शर्तें पढ़ें और उसी के हिसाब से अपनी योजना बनाएं।