Indian Share Market Crash Amid Iran US Tension: आज की खबर से तमाम छोटे और बड़े निवेशकों में भारी हड़कंप है। आज 30 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बहुत ही ज्यादा कमजोर रही है। सेंसेक्स 922 अंकों की एक बड़ी और भारी गिरावट के साथ 76573 के लेवल पर आ गया है। वहीं, एनएसई का निफ्टी भी 302 अंकों का बड़ा गोता लगाकर 23875 के स्तर पर पहुंच गया है।
शेयर बाजार में आई इस अप्रत्याशित और भारी गिरावट के पीछे मुख्य तौर पर अमेरिका-ईरान तनाव बड़ा कारण है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से भी बाजार पर दबाव बना है। एनएसई पर आज केवल 639 शेयर हरे निशान में जबकि 1986 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 0.2% की गिरावट के साथ 95.02 के स्तर पर खुला है।
एशियाई बाजारों में आज गुरुवार को बहुत ही ज्यादा गिरावट और निराशा देखने को मिली है। जापान का निक्केई सूचकांक 1.10% और टॉपिक्स सूचकांक 1.48% तक नीचे गिर गया है। इसके साथ ही गिफ्ट निफ्टी भी करीब 67 अंकों की भारी छूट पर कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी बाजारों में फेडरल रिजर्व की नीति और टेक कंपनियों के नतीजों के बाद मिला-जुला रुख रहा। डॉऊ जोन्स 280.12 अंक यानी 0.57% गिरकर 48,861.81 के स्तर पर आ गया है। हालांकि नैस्डैक कंपोजिट में मामूली 9.44 अंकों की तेजी दर्ज की गई और वह 24,673.24 पर बंद हुआ।
वैश्विक बाजार में आज कच्चे तेल की कीमतों में बहुत ही तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल रिकॉर्ड तोड़ते हुए 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। वहीं डब्लूटीआई (WTI) क्रूड भी छलांग लगाते हुए 107 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
कोटक सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट श्रीकांत चौहान के अनुसार बाजार में तेजी के लिए सेंसेक्स को 77,800 पार करना जरूरी है। निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अब एक बहुत ही प्रमुख आधार और सपोर्ट बन चुका है। मयंक जैन का कहना है कि अगर यह 24000 का सपोर्ट टूटता है तो अगला सपोर्ट 23,750 पर है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बैठक में अपनी ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया है। फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों को 3.5%-3.75% के स्तर पर ही पूरी तरह से स्थिर रखा है। लेकिन महंगाई को लेकर फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल का रुख बाजार के लिए अभी भी बहुत सख्त है।
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में लगातार गतिरोध जारी रहने से तनाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट में जारी इस ताजा गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पहले से काफी गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि परमाणु समझौता होने तक ईरान पर दबाव जारी रहेगा।