स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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जोमैटो के बाद स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, अब ऑनलाइन खाना मंगाना होगा और भी महंगा

Platform Fee Increase: जोमैटो के बाद स्विगी ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 17.58 रुपये कर दी है। अब ग्राहकों को हर फूड ऑर्डर पर पहले के मुकाबले अधिक पैसे खर्च करने होंगे जिससे भोजन महंगा हो गया है।

प्रिया सिंह

Online Food Delivery Charges Hike 2026: ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है क्योंकि प्रमुख कंपनियों ने अपनी फीस बढ़ा दी है। जोमैटो द्वारा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब स्विगी ने भी अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में भारी वृद्धि करने का बड़ा निर्णय लिया है। यह बदलाव मुख्य रूप से ऐप के संचालन और तकनीकी रखरखाव के बढ़ते खर्चों को सुचारू रूप से प्रबंधित करने के उद्देश्य से किया गया है। अब उपभोक्ताओं को अपने पसंदीदा खाने का घर बैठे आनंद लेने के लिए हर ऑर्डर पर अतिरिक्त भुगतान करने की सख्त आवश्यकता होगी।

स्विगी की फीस बढ़ोत्तरी

फूड डिलीवरी दिग्गज स्विगी ने हाल ही में अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में 17 प्रतिशत की एक महत्वपूर्ण वृद्धि करने की आधिकारिक घोषणा की है। अब ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर पर 17.58 रुपये (जीएसटी सहित) का भुगतान करना होगा, जबकि पहले यह शुल्क केवल 14.99 रुपये निर्धारित था। कंपनी के अनुसार इस वृद्धि का मुख्य उद्देश्य ऐप के संचालन और तकनीकी रखरखाव की लागत को भविष्य में प्रभावी ढंग से संभालना है।

पिछला शुल्क इतिहास

इससे पहले अगस्त 2025 में भी स्विगी ने अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में करीब 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी जो पहले 12 रुपये थी। इस ताजा बढ़ोतरी के साथ स्विगी ने अपने बिलिंग सिस्टम में कुल 2.59 रुपये का इजाफा किया है जिससे अब हर ऑर्डर महंगा हो गया है। लगातार बढ़ती लागत के कारण कंपनी को समय-समय पर अपने शुल्क ढांचे में तकनीकी बदलाव करने की आवश्यकता महसूस होती रही है।

जोमैटो की नई दरें

स्विगी से पहले जोमैटो ने भी अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में 19.2 प्रतिशत या 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर का भारी इजाफा करने का फैसला किया था। जोमैटो की नई प्लेटफॉर्म फीस अब 14.90 रुपये (जीएसटी से पहले) हो गई है जो कि पहले केवल 12.5 रुपये पर स्थिर बनी हुई थी। जीएसटी जोड़ने के बाद जोमैटो पर भी ग्राहकों को प्रति ऑर्डर 17.58 रुपये का शुल्क देना पड़ रहा है जो उपभोक्ताओं के लिए अधिक है।

बाजार की स्थिति

यह शुल्क वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में एलपीजी की कीमतों में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है जिससे चिंता है। रेस्तरां की परिचालन लागत बढ़ने और ईंधन की कीमतों में बदलाव के कारण डिलीवरी कंपनियों पर भी अब निरंतर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। जोमैटो ने इससे पहले सितंबर 2025 में बदलाव किया था और फरवरी 2025 में शुल्क 6 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किया था।

शेयर बाजार का हाल

खबरों के बीच स्विगी के शेयरों में तेजी देखी गई और दोपहर 12:30 बजे यह 2.55 प्रतिशत बढ़कर 279.55 रुपये पर पहुंच गया। हालांकि पिछले एक महीने में शेयर 10 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 36 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट पहले ही देख चुका है। निवेशक इस शुल्क वृद्धि को कंपनी के राजस्व में सुधार के एक बड़े प्रयास के रूप में देख रहे हैं जिससे बाजार में हलचल है।

ग्राहकों पर प्रभाव

इन सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए अब बाहर से खाना मंगाना मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला साबित हो रहा है। दोनों प्रमुख कंपनियां लाभप्रदता बढ़ाने और अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सेवा शुल्कों को लगातार संशोधित कर रही हैं। आने वाले समय में अन्य छोटे प्लेटफॉर्म भी अपने सेवा शुल्कों में इसी तरह की बढ़ोतरी कर सकते हैं ऐसी पूरी संभावना बनी है।

बजट और विकल्प

ग्राहकों के बिल में होने वाले इस बदलाव का सीधा असर दैनिक रूप से खाना मंगाने वाले कामकाजी युवाओं और परिवारों पर गहराई से पड़ेगा। कंपनियों का तर्क है कि बेहतर सेवा और तेजी से डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लेना अब बहुत अनिवार्य हो गया है। हालांकि मध्यम वर्ग के लिए खाने की थाली की कीमत में लगातार हो रहा यह इजाफा भविष्य में काफी चिंताजनक विषय बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिलीवरी क्षेत्र में एकाधिकार जैसी स्थिति होने के कारण कंपनियां आसानी से अपनी कठोर व्यापारिक शर्तें बदल रही हैं। प्रतिस्पर्धा कम होने और परिचालन लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं के पास बहुत सीमित विकल्प बचते हैं जिससे उन्हें बढ़ी हुई कीमतें चुकानी पड़ती हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मूल्य वृद्धि का असर इन ऐप्स के कुल ऑर्डर वॉल्यूम पर क्या पड़ता है।

भविष्य की रणनीति

स्विगी और जोमैटो के बीच चल रही इस होड़ ने उपभोक्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वे होम डिलीवरी चुनेंगे। प्लेटफॉर्म फीस के अलावा अन्य करों और डिलीवरी पार्टनर फीस को मिलाकर अब एक साधारण भोजन का कुल बिल काफी बढ़ जाता है। कंपनियां अपने निवेशकों को खुश करने के लिए मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं जिसके लिए अंततः आम ग्राहकों की जेब पर भार है।

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