Highlights:
सेंसेक्स ने 72,514.57 और निफ्टी ने 22,387.35 का दिन का निचला स्तर छुआ।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक अनिश्चितताएं बाजार के लिए चिंता बनी हुई हैं।
अमेरिकी फेड की बैठक, सितंबर तिमाही के नतीजों और FII-DII गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सोमवार को वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान को लेकर चिंता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
सेंसेक्स ने दिन के कारोबार में 609 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 72,514.57 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 22,387.35 तक पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक, कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों पर है।
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 73,123.83 के बंद स्तर के मुकाबले 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 72,990.04 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 22,600 के मुकाबले 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत टूटकर 22,524.40 पर खुला।
कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 में 212.65 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,387.35 के स्तर तक फिसल गया।
व्यापक बाजार में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.81 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार कारोबार में ज्यादातर सूचकांक गिरावट के साथ रहे। निफ्टी पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी जैसे सेक्टरों में एक प्रतिशत से ज्यादा तक की कमजोरी देखने को मिली।
हालांकि, निजी बैंकिंग शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 0.49 प्रतिशत चढ़ा। फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों का प्रदर्शन भी दूसरे प्रमुख सेक्टरों के मुकाबले बेहतर रहा।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी दो प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कीमतों में गिरावट के बावजूद कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा रहने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार में निवेशकों की धारणा पर भी पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक शामिल है। बाजार में व्यापक रूप से उम्मीद है कि फेड ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा।
हालांकि, बैठक के बाद जारी होने वाला उसका बयान और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत अहम होंगे। अमेरिकी ब्याज दरों और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बदलाव से डॉलर की चाल प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर भी पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट की एक वजह मार्जिन फंडिंग के जरिए किए गए सौदों का बंद होना रहा। जब निवेशक उधार या मार्जिन के सहारे बनाए गए ट्रेड से बाहर निकलते हैं, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
हालिया गिरावट के बाद कुछ शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, केवल कीमत गिरने को खरीदारी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों के लिए कंपनियों की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और बाजार से जुड़े जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।
वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों और शेयरों में निवेश को लेकर बदलती धारणा का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई थीम में तेजी कमजोर पड़ने से उन बाजारों पर असर हो सकता है, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों का दबदबा ज्यादा है।
दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी के मुकाबले भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने की बात भी कही गई है। हालांकि, इससे भारतीय बाजार में आगे तेजी आने की गारंटी नहीं मिलती। घरेलू आर्थिक स्थिति, कंपनियों के नतीजे, तेल की कीमतें और विदेशी निवेश की दिशा आगे भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
पिछले कारोबारी सत्र, 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में 887 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है, लेकिन एक या दो सत्र के आंकड़ों से बाजार की आगे की दिशा तय नहीं की जा सकती। निवेशकों को लगातार कई कारोबारी सत्रों के आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर भी नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेड का रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
हालिया गिरावट के बाद कुछ शेयरों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी है। निवेशकों को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।