बैंक ऑफ कोरिया (सौजन्य : सोशल मीडिया) 
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साउथ कोरिया की जनता को मिली राहत, केंद्रीय बैंक ने कम की ब्याज दर

साउथ कोरिया की केंद्रीय बैंक ने 4 साल में पहली बार अपने रेपो रेट में कटौती करके जनता को राहत दी है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर री चांग-योंग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अर्थव्यवस्था में अब भी अतिरिक्त कटौती की क्षमता रखने की भी बात बतायी है।

अपूर्वा नायक

सियोल : साउथ कोरिया की केंद्रीय बैंक ने वहां रहने वाली जनता को एक राहत की खबर दी है। यहां के सेंट्रल बैंक ने 4 साल में पहली बार अपने रेपो रेट में कटौती की है। साउथ कोरिया के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ कोरिया ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद एक अहम फैसला लिया है, जिसमें ब्याज दर में एक चौथाई कटौती कर दी गई है। इस कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 3.25 प्रतिशत हो गया है। दुनिया की सभी इकोनॉमी कोविड-19 वैश्विक महामारी से जुझने के बाद मई 2020 के बाद से कर्ज लेने पर लगने वाले रेपो रेट को कम करने के लिए ये पहला कदम है।

बैंक ने मुद्रास्फीति और बढ़ते घरेलू ऋण के बारे में चिंताओं के बीच अगस्त 2021 में दर में एक चौथाई प्रतिशत की बढ़त की थी और फिर 3 साल से अधिक समय तक दरों को स्थिर रखा। केंद्रीय बैंक के गवर्नर री चांग-योंग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अर्थव्यवस्था में अब भी अतिरिक्त कटौती की क्षमता है। राजधानी क्षेत्र में मकानों की कीमतें अगस्त की तुलना में सितंबर में दो तिहाई कम बढ़ी हैं। देश की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति भी सितंबर में घटकर 1.6 प्रतिशत रह गई, जो दो प्रतिशत के नीतिगत लक्ष्य से कम है।

देश की वित्तीय स्थिति स्थिर

हालांकि, री ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालना अब भी जल्दबाजी होगी कि देश की वित्तीय स्थिति स्थिर हो रही है या नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि बैंक आगे भी ब्याज दरों में कटौती के मामले में रूढ़िवादी रुख अपनाएगा। री ने कहा, ‘‘ हम वित्तीय बाजारों में स्थिरता पर गौर करने के बाद निर्णय लेंगे।''

रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा

हाल ही में भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपनी नौवीं मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रेपो रेट की दर में कोई बदलाव ना करके उसे स्थिर रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी, 2023 से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि दिसंबर के महीने में ही इसमें कुछ ढील की गुंजाइश है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर बनी रहे।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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