क्या डूब रही हैं आपकी SIP? (सोर्स- डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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मार्केट में गिरावट से सहमा मिडिल क्लास, क्या डूब रही हैं आपकी SIP? जानिए पैसा निकालना सही या रखना

SIP investment: मार्केट में गिरावट से मिडिल क्लास निवेशकों में डर, क्या SIP में पैसा निकालना सही है या निवेश जारी रखें? जानिए एक्सपर्ट्स की राय और रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का महत्व।

मनोज आर्या

Highlights:

  • वैश्विक स्तर पर मची आर्थिक उथल-पुथल का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है।

  • कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई।

  • मार्केट में गिरावट को लेकर मिडिल क्लास SIP और इक्विटी में निवेश करने से डर रहा।

वैश्विक स्तर पर मची आर्थिक उथल-पुथल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई की बढ़ती चिंताओं के बीच घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के देखने को मिल रही है। वहीं, विदेशी निवेशकों की निकासी से मार्केट का बुरा हाल है।

इस बीच मिडिल क्लास के निवेशकों में डर है कि क्या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में हर महीने जाने वाला उनका पैसा डूब रहा है? क्या उन्हें एसआईपी में निवेश करते रहना चाहिए या पैसा निकालकर मार्केट से बाहर हो जाना चाहिए? आइए इन सभी सवालों का जवाब जानते हैं।

म्यूचुअल फंड्स और SIP की मौजूदा स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, जब भी बाजार में तेज गिरावट या अस्थिरता आती है, तो रिटेल निवेशकों में घबराहट और डर का माहौल देखने को मिलती है। लेकिन, एक्सपर्ट्स की माने तो एसआईपी लॉन्ग-आइसोलेटेड वेल्थ क्रिएशन के लिए बनाई गई स्ट्रैटजी है। म्यूचुअल फंड के आकंड़ों से साफ होता है कि बाजार के अच्छे दौर की तरह ही करेक्शन के दौरान मिलने वाली यूनिट्स सस्ती दरों पर मिलती हैं, जिससे लंबी अवधि में 'रूपी कॉस्ट एवरेजिंग' का पूरा फायदा मिलता है।

पाठकों को समझने में आसानी के लिए यहां यह जान लेना जरूरी है कि 'रूपी कॉस्ट एवरेजिंग' क्या है। रूपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging - RCA) एक ऐसी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी है, जिसमें बाजार की स्थिति की परवाह किए बिना, नियमित अंतराल (जैसे हर महीने) पर एक तय राशि का निवेश किया जाता है।

गिरावट से क्यों सहमा मिडिल क्लास?

मिडिल क्लास परिवार अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा भविष्य की जरूरतों जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट के लिए म्यूचुअल फंड्स में लगाते हैं। जब पोर्टफोलियो में लाल निशान दिखाई देने लगते हैं, तो डर स्वाभाविक है।

कई नए निवेशकों को यह भ्रम हो जाता है कि बाजार गिरने से उनका पूरा पैसा डूब रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह केवल मार्क-टू-मार्केट यानी मौजूदा वैल्यू में उतार-चढ़ाव होता है।

पैसा निकालना सही या निवेश जारी रखें?

एक्सपर्ट के मुताबिक, बाजार की गिरावट को देखते हुई जल्दबाजी में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी में निवेश रोकना या पैसा निकालकर बाजार से मार्केट से बाहर आना बड़ी गलती साबित हो सकती है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं-

रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा

बाजार जब नीचे होता है, तो कम नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार दोबारा ऊपर चढ़ेगा, तो यही यूनिट्स आपको बड़ा मुनाफा पहुंचा सकती हैं।

लॉन्ग टर्म निवेश पर फोक्स

एसआईपी को कम से कम 5 से 7 साल या उससे अधिक के नजरिए से शुरू किया जाता है। शॉर्ट-टर्म की उठापटक को देखते हुए निवेश को बीच में रोकना या बंद कर देना लॉन्ग-टर्म गोल्स को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।

कंपनी के फंडामेंटल्स पर भरोसा

यदि आपने किसी अच्छी स्कीम या फंड हाउस में निवेश किया है, तो अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मजबूत बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के दम पर मार्केट में रिकवरी तय मानी जाती है। इसलिए कोई भी फैसले लेने से पहले नुकसान और मुनाफे की तुलना करें।

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स सलाह

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में अपने निवेश को रिडीम करने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों की समीक्षा करनी चाहिए। यदि आपका गोल अभी दूर है, तो एसआईपी को बिल्कुल बंद न करें। इसके उलट, कई अनुभवी निवेशक इस तरह के डिप का इस्तेमाल चुनिंदा फंड्स में अतिरिक्त निवेश करने के लिए करते हैं।

Disclaimer: (यहां दी गई जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। NavbharatLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

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