Reliance Infra fund diversion case: शेयर बाजार के नियामक सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। सेबी ने कंपनी के लगभग 700 मिलियन डॉलर (₹6,526 करोड़) के फंड के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की अनिल अंबानी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अनिल अंबानी और रिलायंस इंफ्रा ने सेबी से इस गंभीर मामले को सेटलमेंट प्रक्रिया के तहत बंद करने की अनुमति मांगी थी, जिसे नियामक ने स्वीकार नहीं किया।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अनिल अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर आरोप है कि उन्होंने ₹6,526 करोड़ की भारी-भरकम राशि को गलत और संदिग्ध तरीकों से अनिल अंबानी से जुड़ीं अन्य कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया था।
मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने सितंबर 2025 में इस मामले का खुलासा करते हुए आरोप लगाया था कि ये तमाम ट्रांजैक्शंस सार्वजनिक शेयरधारकों के कॉर्पोरेट हितों या कंपनी के मुख्य कामकाज को पूरा करने के बजाय, पूरी तरह से निजी फायदे के लिए किए गए थे, जो सीधे तौर पर फंड का गलत इस्तेमाल है। सेबी ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि इस बड़े वित्तीय घोटाले की जांच केवल बाजार नियामक के स्तर पर ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की अन्य प्रमुख सरकारी एजेंसियां भी इसमें गहराई से जुटी हुई हैं। इनमें वित्तीय अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर धोखाधड़ी की जांच करने वाले केंद्रीय विभाग (जैसे ईडी और सीबीआई) शामिल हैं। सेबी के नियमों के मुताबिक, जब कोई मामला अन्य आपराधिक या वित्तीय जांच एजेंसियों के अधीन होता है, तो उसमें सेबी स्तर पर सेटलमेंट की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सेबी के नियमों के तहत कोई भी कंपनी या व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार किए बिना एक निश्चित जुर्माना या शुल्क भरकर मामले को कानूनी रूप से सुलझा सकता है। लेकिन अब जब सेबी ने इस सेटलमेंट अर्जी को खारिज कर दिया है, तो नियामक जल्द ही इस कथित उल्लंघन का पूरा ब्योरा देते हुए एक विस्तृत और सार्वजनिक आदेश जारी करेगा। इस आदेश के तहत अनिल अंबानी और उनकी कंपनी पर भारी जुर्माने से लेकर शेयर बाजार में ट्रेडिंग या एंट्री करने पर कड़ा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर इस आदेश के खिलाफ संबंधित न्यायाधिकरण या कोर्ट में अपील दायर कर सकती है।
इस पूरे विवाद पर अनिल अंबानी के रिलायंस समूह के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रवक्ता का कहना है कि ये मामले फिलहाल अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं और ग्रुप अपनी कानूनी टीम की सलाह के अनुसार अदालतों में अपना पक्ष मजबूती से रखना जारी रखेगा। गौरतलब है कि अनिल अंबानी के लिए सेटलमेंट खारिज होने का यह दूसरा बड़ा झटका है; इससे पहले सेबी ने भारत के यस बैंक (Yes Bank) में निवेश से जुड़े एक अन्य मामले में भी उनकी ऐसी ही सेटलमेंट अर्जी को नामंजूर कर दिया था।
पिछले 18 महीनों के दौरान अनिल अंबानी और उनके रिलायंस समूह पर रेगुलेटर्स और केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा बेहद कड़ा हुआ है। इस दौरान अनिल अंबानी समेत समूह के कई शीर्ष अधिकारियों से लंबी पूछताछ हो चुकी है। धोखाधड़ी और हेरफेर के आरोपों में रिलायंस ग्रुप के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है, जबकि अनिल अंबानी से जुड़ी कई संपत्तियों को फ्रीज (जब्त) कर दिया गया है। फिलहाल सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस पूरे मामले में लगातार एक्शन मोड में हैं।
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इस चौतरफा कानूनी संकट का सीधा और बुरा असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा है। शेयर बाजार में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों की ट्रेडिंग फिलहाल पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। ट्रेडिंग बंद होने से ठीक पहले इसके एक शेयर की आखिरी कीमत महज 77 रुपये दर्ज की गई थी। मौजूदा समय में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर कंपनी के स्टॉक स्टेटस के आगे 'Trading Restricted' (ट्रेडिंग प्रतिबंधित) का आधिकारिक संदेश दिखाई दे रहा है, जिससे निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।