सेबी ने खत्म किया मनमानी फीस का खेल, अब प्रदर्शन पर आधारित होंगे शुल्क (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Mutual Fund के नए नियम: सेबी ने खत्म किया मनमानी फीस का खेल, अब प्रदर्शन पर आधारित होंगे शुल्क

SEBI New Rules 2026: सेबी के नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। अब म्यूचुअल फंड रिटर्न के आधार पर फीस वसूलेंगे। इक्विटी ब्रोकरेज कैप घटकर 0.06% हुआ, जिससे निवेशकों का खर्च कम और पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रिया सिंह

Sebi performance based fee mutual fund: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद म्यूचुअल फंड के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। ये नए सुधार 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य फंड हाउसों की जवाबदेही तय करना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

अब फंड मैनेजरों को उनके द्वारा दिए गए रिटर्न के आधार पर ही फीस वसूलने की अनुमति दी जाएगी, जिससे उद्योग में पारदर्शिता और प्रदर्शन की संस्कृति विकसित होगी। सेबी के इस क्रांतिकारी कदम से छोटे निवेशकों का बाजार में भरोसा बढ़ेगा और उन्हें अपने निवेश का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

प्रदर्शन आधारित मैनेजमेंट फीस

सेबी ने निवेश के क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘बेस एक्सपेंस रेश्यो’ की नई अवधारणा पेश की है। अब फंड हाउस मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे बल्कि उनका शुल्क सीधे तौर पर फंड के प्रदर्शन से जुड़ा होगा। अगर फंड मैनेजर बेंचमार्क के मुकाबले शानदार रिटर्न देता है, तो वह अधिक मैनेजमेंट फीस लेने का हकदार होगा। इसके विपरीत, खराब प्रदर्शन की स्थिति में फंड हाउस को अपनी फीस में अनिवार्य रूप से कटौती करनी होगी।

ब्रोकरेज कैप में भारी कटौती

निवेशकों को राहत देते हुए सेबी ने ट्रेडिंग लागत को कम करने के लिए ब्रोकरेज शुल्क की ऊपरी सीमा घटा दी है। इक्विटी सेगमेंट में ब्रोकरेज कैप को 0.085% से कम करके अब 0.06% कर दिया गया है। इसी तरह, डेट सेगमेंट में यह सीमा 0.0389% से घटाकर मात्र 0.02% निर्धारित की गई है। इस कटौती से फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और निवेशकों का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।

टैक्स और शुल्कों की पारदर्शिता

अक्सर निवेशकों को निवेश से काटे गए पैसों के वास्तविक गंतव्य की जानकारी नहीं होती थी। अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और स्टांप ड्यूटी जैसे शुल्कों को अलग से दिखाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा एग्जिट लोड की गणना भी स्पष्ट रूप से करनी होगी ताकि निवेशक समझ सकें कि कितना पैसा टैक्स में गया। यह पारदर्शिता निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का बेहतर विश्लेषण करने में सक्षम बनाएगी।

व्यक्तिगत जवाबदेही और गवर्नेंस

सेबी ने फंड हाउस के प्रबंधन और गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर दी है। अगर फंड प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित ट्रस्टी और अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे। निवेशकों की सुरक्षा को अब फंड हाउस की सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया गया है। नियमों के उल्लंघन पर सेबी अब पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान कर रहा है।

छोटे निवेशकों का सशक्तिकरण

इन बदलावों का सबसे बड़ा लाभ उन निवेशकों को होगा जो लंबी अवधि के लिए बाजार में पैसा लगाते हैं। ब्रोकरेज शुल्क में 30% से 49% तक की कमी आने से कंपाउंडिंग का लाभ बढ़ जाएगा। अब फंड मैनेजर केवल पोर्टफोलियो में ज्यादा खरीद-बिक्री (Churning) करके मुनाफा नहीं कमा पाएंगे, क्योंकि कम ब्रोकरेज कैप इसे हतोत्साहित करेगा। यह सुधार भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग को वैश्विक मानकों के करीब ले जाएगा और निवेश की लागत को न्यूनतम बनाएगा।

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