विजय शेखर शर्मा, फोटो - सोशल मीडिया  
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Paytm के फाउंडर ने छोड़े 2.1 करोड़ ESOPs, पेंडिंग सेबी मामले को सुलझाया

2021 में, कंपनी में विजय शेखर शर्मा की हिस्सेदारी 14.7 प्रतिशत थी, लेकिन उन्होंने एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज के जरिए शर्मा फैमिली ट्रस्ट को 3.09 करोड़ शेयर ट्रांसफर करके अपनी हिस्सेदारी 10% से कम कर दी थी।

विकास कुमार उपाध्याय

नवभारत बिजनेस डेस्क : पेटीएम के पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के सीईओ विजय शेखर शर्मा और उनके भाई अजय शेखर शर्मा ने गुरुवार को बाजार नियामक सेबी के साथ कंपनी के कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ESOPs) से संबंधित एक मामले का निपटारा किया और कुल 2.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

सेबी द्वारा पारित आदेश के मुताबिक, समझौते के एक हिस्से के रूप में, विजय शेखर शर्मा 3 साल की अवधि के लिए किसी भी सूचीबद्ध कंपनी से कोई भी नया ईएसओपी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा, सेबी ने वन97 कम्युनिकेशंस (OCL) को दो भाइयों को दिए गए ईएसओपी को रद्द करने का निर्देश दिया है। तदनुसार, विजय और अजय को दिए गए क्रमशः 2.1 करोड़ और 2.23 लाख के ईएसओपी रद्द कर दिए गए।

पिछले महीने, विजय ने स्वेच्छा से लगभग 1,800 करोड़ रुपये के 2.1 करोड़ शेयर सरेंडर कर दिए, वन97 कम्युनिकेशंस ने एक नियामक फाइलिंग में कहा। इसके अलावा, ओसीएल और विजय ने मामले को निपटाने के लिए 1.11-1.11 करोड़ रुपये भेजे, जबकि अजय ने 57.11 लाख रुपये का भुगतान किया।

ये है पूरा मामला

आपको बता दें, यह मामला मूल रूप से इस बात पर था कि क्या पेटीएम के आईपीओ दस्तावेजों में विजय शेखर शर्मा को प्रमोटर के रूप में दिखाया जाना चाहिए था। 2021 में, कंपनी में विजय शेखर शर्मा की हिस्सेदारी 14.7 प्रतिशत थी, लेकिन उन्होंने एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज के जरिए शर्मा फैमिली ट्रस्ट को 3.09 करोड़ शेयर ट्रांसफर करके अपनी हिस्सेदारी 10% से कम कर दी, जिससे वे ESOP के लिए पात्र हो गए। सेबी ने इस बात पर भी सवाल उठाए थे कि उस समय के स्वतंत्र निदेशकों ने विजय की 'गैर-प्रवर्तक' स्थिति का समर्थन क्यों किया। झटके में निवेशकों के 5 लाख करोड़ स्वाहा, पाकिस्तान पर ड्रोन अटैक की खबर आते ही शेयर मार्केट धड़ाम

कानूनी प्रतिनिधित्व और निपटान प्रक्रिया

फिनसेक लॉ एडवाइजर्स ने वन97 की ओर से मामले का प्रतिनिधित्व किया, जबकि रेगस्ट्रीट लॉ ने विजय शेखर शर्मा और अजय शर्मा की ओर से सेबी के समक्ष दलीलें रखीं। पूरा मामला सेबी के निपटान तंत्र के तहत सुलझाया गया, जहां संबंधित पक्ष वित्तीय राशि का भुगतान करके या कोई गलती स्वीकार किए बिना सुधारात्मक कदम उठाकर मामले को समाप्त कर सकते हैं।

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