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डिजिटल गोल्ड में निवेश सेफ नहीं, SEBI ने किया अलर्ट; निवेशकों को दिया ये सलाह

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड ऑनलाइन निवेश उत्पाद है, जो निवेशक को डिजिटल रूप में सोना खरीदने, बेचने और होल्ड करने की अनुमति देता है। भारत में अब तक इसमें छह लाख लोग निवेश कर कर रहे हैं।

मनोज आर्या

SEBI On Digital Gold: डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को सेबी ने अलर्ट किया है। बाजार नियामक ने कहा कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप 'डिजिटल गोल्ड' या 'ई-गोल्ड' को सोने में निवेश का आसान विकल्प बताकर बढ़ावा दे रहे हैं। सेबी ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रोडक्ट न तो किसी सुरक्षित निवेश के रूप में लिस्ट हैं और न ही वायदा कारोबार के तहत आते हैं। यानी ये सेबी के नियामक दायरे से बाहर हैं। ऐसे में इनमें निवेश करने वाले निवेशकों को कई तरह के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें।

डिजिटल गोल्ड क्या है?

यह ऑनलाइन निवेश उत्पाद है, जो निवेशक को डिजिटल रूप में सोना खरीदने, बेचने और होल्ड करने की अनुमति देता है। जब कोई डिजिटल गोल्ड खरीदता है तो उसके बराबर की भौतिक सोने की मात्रा विक्रेता कंपनी की ओर से सुरक्षित रखी जाती है। देश में प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं, जो डिजिटल गोल्ड की सुविधा प्रदान करते हैं।

निवेशक ऐसे समझें पूरी प्रक्रिया

  • किसी प्लेटफॉर्म (जैसे फिनटेक ऐप, वेबसाइट, बैंकिंग ऐप आदि) से ऑनलाइन सोना खरीदने पर बदले में उतना सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है।
  • प्लेटफॉर्म होल्डिंग को डिजिटल रूप में दिखाता है। आप इसे कभी भी बेच सकते हैं और पैसा तुरंत खाते में आ जाता है।
  • चाहें तो बाद में सिक्के बार के रूप में भौतिक सोना प्राप्त कर सकते हैं।

डिजिलट गोल्ड में निवेश से पहले सावधान रहें

  • केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से खरीदें, शर्तें और शुल्क ध्यान से पढ़े
  • सर्टिफिकेट और शुद्धता जांचें, स्टोरेज नियम समझे
  • सुरक्षित भुगतान तरीका इस्तेमाल करें

फंस सकती है रकम

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद न तो सेबी के अधीन आते हैं, न ही आरबीआई के। इस वजह से यह पूरा क्षेत्र जोखिम से भरा हुआ है। कई कंपनियां सुरक्षित स्टोरेज स्टोरेज जैसे दावे करती है लेकिन इन दावों की कोई स्वतंत्र ऑडिट नहीं होता है। अगर प्लेटफॉर्म बंद हो हो गया या दिवालिया हो गया, तो निवेशक का पैसा फंस सकता है। भले ही ब्रांड नामी क्यों न हो।

  • अधिकांश मंच डिजिटल सोने को लगभग एक समयसीमा तक ही मुफ्त स्टोर करते हैं।
  • इसके बाद शुल्क देना पड़ सकता है या फिर सोना बेचने का विकल्प अपनाना होगा।
  • अगर विक्रेता कंपनी दिवालिया हो जाए तो तो दावा करना मुश्किल हो सकता है।
  • स्टोरेज, खरीद-बिक्री पर शुल्क, यह सब लंबे समय में बोझ बन सकते हैं।
  • ऑनलाइन लेनदेन है तो हैकिंग या धोखाधड़ी से इनकार की आशंका बनी रहती है।

क्या-क्या जांचें?

प्रोवाइडर कस्टोडियन कंपनी कौन सी है? यानी सोना कहां रखा है, स्टोरेज का बीमा है या नहीं। इसके साथ ही कंपनी का ऑडिट होता है या नहीं। शुद्धता और रिडेम्पशन विकल्प में कितनी पारदर्शिता है। वहीं, स्टोरेज अवधि और उसका शुल्क कितना है। कितने साल तक मुफ्त है और बाद में कितना शुल्क लगेगा। निवेश करने से पहले ये सभी जानकारियां बेहद अहम हैं।

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