भारत का औद्योगिक विकास (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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Industrial Production Growth: भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जून में 7.3 प्रतिशत तक मजबूत हुई

Industrial Production Growth: भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जून में 7.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। मजबूत घरेलू मांग और शानदार निर्यात ने इस आर्थिक वृद्धि में अपनी सबसे अहम भूमिका निभाई है।

प्रिया सिंह

India Industrial Production Growth: वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में भारत के बाह्य और घरेलू क्षेत्रों ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। वस्तुओं के निर्यात में भारी वृद्धि और मजबूत घरेलू मांग के कारण भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जून में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत रही है। यह अहम जानकारी केयरएज रेटिंग्स द्वारा बुधवार को जारी की गई एक विशेष आर्थिक रिपोर्ट में पूरी तरह से विस्तार से दी गई है। वैश्विक अनिश्चितता के मुश्किल समय में भी भारत का आर्थिक और औद्योगिक प्रदर्शन लगातार काफी मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून के बीच सामानों के निर्यात में शानदार और तेज वृद्धि स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है। इसके अलावा देश के अंदर मौजूद मजबूत घरेलू मांग भी अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही बड़ा और अहम कारक बनी हुई है। औद्योगिक क्षेत्र का समग्र प्रदर्शन अधिकांश सेक्टरों में काफी मजबूत रहा है, हालांकि इसमें खनन और उत्खनन क्षेत्र पूरी तरह अपवाद रहा है। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी भारी उछाल के साथ बढ़कर 7.8 प्रतिशत के शानदार स्तर पर पहुंच गई है।

विनिर्माण क्षेत्र का शानदार प्रदर्शन

पिछले महीने विनिर्माण क्षेत्र की यह अहम वृद्धि दर केवल 5.2 प्रतिशत के स्तर पर मौजूद थी। लेकिन जून के महीने में विनिर्माण के कुल 23 में से 19 उप-क्षेत्रों ने सकारात्मक और बेहतरीन वृद्धि दर्ज की है। इनमें इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में 34 प्रतिशत की बहुत ही बड़ी और दोहरे अंक की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा मोटर वाहन, ट्रेलर एवं सेमी-ट्रेलर क्षेत्र में भी 17.5 प्रतिशत की भारी औद्योगिक वृद्धि स्पष्ट रूप से देखी गई है।

अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारी उछाल

रिपोर्ट के अनुसार देश के कपड़ा क्षेत्र में 13.7 प्रतिशत की शानदार और मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य उत्पाद क्षेत्र ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.8 प्रतिशत की अच्छी और स्थिर वृद्धि हासिल करके सबको प्रभावित किया है। वहीं अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पाद क्षेत्र में भी 12.9 प्रतिशत की शानदार वृद्धि इस दौरान दर्ज की गई है। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में भी 14.2 प्रतिशत का बड़ा इजाफा हुआ है जो अर्थव्यवस्था के लिए काफी अच्छा और शुभ संकेत है।

आईआईपी के शानदार आंकड़े

मध्यवर्ती वस्तुओं का कुल उत्पादन 9.3 प्रतिशत और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन 7.7 प्रतिशत तक तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचा एवं निर्माण सामग्री का उत्पादन 7.5 प्रतिशत और प्राथमिक वस्तुओं का 4.9 प्रतिशत तक बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 5.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज हुई है। इस दौरान इलेक्ट्रिकल उपकरण और मोटर वाहन क्षेत्र में क्रमशः 25.8 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की बहुत ही मजबूत वृद्धि हुई है।

मानसून और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मौसम विभाग के अनुसार 28 जुलाई 2026 तक देश में वर्षा की कुल कमी 40 प्रतिशत से घटकर 15.8 प्रतिशत रह गई है। हालांकि यह आंकड़ा अब भी सामान्य बारिश के स्तर से काफी कम है जिसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण मांग पर मानसून के सीधे प्रभाव का सही आकलन करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में खरीफ फसलों की बुवाई में सुधार होना बाजार के लिए एक बहुत ही बड़ा और सकारात्मक संकेत है।

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