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दिल्ली में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए रलवे ने रद्द की थी 250 ट्रेनें।
शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली जाने वालीं कई ट्रेनें रद्द होने से यात्री परेशान।
ट्रेनें कैंसिल होने से भारतीय रेलवे को 12 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
Indian Railway Loss Due to CJP Protest: भारतीय रेलवे देश के परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। अगर किसी कारण रेल सेवा को बंद कर दिया जाए, देशभर में उथल-पुथल की स्थिति बन जाती है। शुक्रवार और शनिवार का दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आ रहे यात्रियों के लिए भी कुछ ऐसा ही रहा।
जहां, कॉकरोज जनता पार्टी के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन को देखते हुए रेलवे की ओर से कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, जिसकी वजह से रेलवे को 12 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
भारतीय रेलवे के इस फैसले के बाद कई ट्रेनों का रूट बदलना पड़ा। वहीं, मालगाड़ियों की रफ्तार में भी रुकावट आई और कई ट्रेनों को री-शेड्यूल करना पड़ा। पटना से लेकर दिल्ली तक, रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की काफी भीड़ देखी गई। आइए जानते हैं कि इससे आम आदमी और रेलवे को कुल कितना नुकसान हुआ।
इंडियन रेलवे के मुताबिक, सीजेपी प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से शुक्रवार और शनिवार को नई दिल्ली और निजामुद्दीन आने या जाने वाली करीब 250 ट्रेनें कैंसिल करनी पड़ी। अचानक सैकड़ों ट्रेने कैंसिल होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। टिकट कैंसिल होने के बावजूद भी यात्रियों के जीएसटी और पेमेंट गेटवे चार्ज के तौर पर 75 लाख से एक करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ।
रेलवे के जानकारों के मुताबिक, भले ही ग्राहकों को टिकट का 100 फीसदी मूल किराया वापस मिल जाए, लेकिन थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म फीस और टेक्स वापस नहीं मिलते। इसकी भरपाई यात्रियों से ही की जाती है।
आईआरसीटीसी (IRCTC) के जरिए ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को एसी और नॉन-एसी टिकट के लिए 15 से 40 रुपये का सुविधा शुल्क देना होता है। इसके अलावा पैसेंजर्स से पेमेंट गेटवे चार्ज भी लिया जाता है और इन सभी चार्जों के ऊपर जीएसटी भी जोड़ा जाता है। किसी भी स्थिति में टिकट कैंसिल करने या रद्द होने पर ये पैसे वापस नहीं मिलते। जो कि यात्रियों के लिए एक बड़ा नुकसान है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में ट्रेने कैंसिल होने से भारतीय रेलवे को 12 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, कई ट्रेनें के रूट डायवर्ट होने से मालगाड़ियों के संचालन प्रभावित हुए हैं, जिससे रेलवे के राजस्व पर असर पड़ा है।
बता दें कि जब भी किसी रेल रूट पर ट्रेनों की आवाजाही में रुकवाटें आती हैं, तो उसका असर केवल एक स्टेशन या उस रूट तक ही सीमित नहीं रहता है। पूरे रेल नेटवर्क पर उसका असर पड़ता है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह पूरे रेलवे नेटवर्क को प्रभावित करता है।
शुक्रवार और शनिवार को बड़ी संख्या में ट्रेने रद्द होने का सीधा फायदा प्राइवेट बस ऑपरेटरों और टैक्सी चालकों ने उठाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई हिस्सों में यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे दो से तीन गुने अधिक तक का किराया वसूला गया।