जीएसटी (सौजन्य : सोशल मीडिया) 
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सरकार कर रही है आम जनता को महंगे प्रीमियम से राहत देने की तैयारी, जल्द ले सकती है कोई बड़ा फैसला

जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम यानी किश्त में राहत देने पर विचार किया जा सकता है। इस जीएसटी मीटिंग में शामिल होने वाले मंत्री समूह यानी जीओएम दोनों ही इंश्योरेंस पर जीएसटी रेट करने को लेकर अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप चुके हैं।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली : अगले महीने राजस्थान में जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक होने जा रही है। इस बैठक में लिए जाने वाले फैसलों का इंतजार किया जा रहा है। अगर आम जनता की बात की जाए तो इस बैठक में उनके बारे में भी कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

मोदी सरकार पिछले काफी समय से हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम यानी किश्त में राहत देने पर विचार कर रही है। इस फैसले को लेकर हमेशा अटकलें तेज रहती है। इन दोनों इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाली 18 प्रतिशत जीएसटी रेट को कम करने का फैसला इस मीटिंग में लिया जा सकता है। इस मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस मीटिंग का सबसे अहम मुद्दा हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से जुड़े हुए हो सकते हैं।

पहले ही सौंप चुके है रिपोर्ट

इस जीएसटी मीटिंग में शामिल होने वाले मंत्री समूह यानी जीओएम दोनों ही इंश्योरेंस पर जीएसटी रेट करने को लेकर अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप चुके हैं। कुछ विशेष सूत्रों का कहना है कि जीओएम यानी मंत्री समूह ने 5 लाख तक के इंश्योरेंस पर लगने वाली जीएसटी दरों को हटाने का फैसला लिया है। हालांकि जानकार ये भी बता रहे हैं कि 5 लाख रुपये से ज्यादा के इंश्योरेंस पर जीएसटी रेट को मौजूदा लेवल से घटाए जाने का फैसला लिया जा सकता है।

देना होता है 18 फीसदी दर

आपको बता दें कि फिलहाल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस दोनों पर 18 फीसदी जीएसटी दर का भुगतान करना पड़ता है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जीएसटी काउंसिल इसे घटाकर 12 फीसदी तक करने का फैसला कर सकते हैं या इसकी दर को इससे भी ज्यादा कम किया जा सकता है।

कई राज्यों ने किया समर्थन

कई राज्यों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। इन राज्य सरकारों ने भी ये माना है कि देश की आम जनता के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सिक्योरिटी को लेकर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि कई राज्य सरकारें ऐसी भी है जो सरकार के इस फैसले से नाखुश भी हो सकती है। कुछ राज्यों ने ये तर्क दिया है कि अगर केंद्र सरकार इंश्योरेंस से जीएसटी दर को कम करती है, तो इसका सीधा असर राज्य के रेवेन्यू पर पड़ सकता है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि यदि सरकार 5 लाख रुपये तक के इंश्योरेंस पर से जीएसटी को हटाती है, तो इससे तकरीबन 2100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार कोई और रास्ता ढूंढकर 5 लाख पर लगने वाली जीएसटी दर को कम करने का फैसला ले सकती है।

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