India's Fiscal Deficit: चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त तक) में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (फिसकल डिफिसिट) 7.10 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित बजट अनुमान (बीई) का 41.9 प्रतिशत है। वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह स्तर पिछले वर्ष की समान अवधि में वार्षिक लक्ष्य के 38.1 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा निर्धारित किया है। केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत पर रखा था।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान केंद्र सरकार को कुल 13,67,709 करोड़ रुपये की प्राप्तियां हुईं, जो पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 37.5 प्रतिशत है। इसमें 8,37,921 करोड़ रुपये का नेट टैक्स रेवेन्यू, 4,54,549 करोड़ रुपये का नॉन-टैक्स रेवेनेयू और 75,239 करोड़ रुपये की नॉन-डेट कैपिटल शामिल हैं।
इसी अवधि में केंद्र सरकार ने राज्यों को टैक्स में उनके हिस्से के रूप में 5,90,391 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। हालांकि, यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 60,243 करोड़ रुपये कम रही।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि खर्च के मोर्चे पर अप्रैल-अगस्त के दौरान केंद्र सरकार का कुल खर्च 20,77,958 करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 38.9 प्रतिशत है। इसमें 15,68,009 करोड़ रुपये राजस्व व्यय (Revenue expenditure) और 5,09,949 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) के रूप में खर्च किए गए।
राजस्व व्यय में सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान का रहा, जिस पर 5,14,810 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अलावा प्रमुख सब्सिडियों पर 1,87,037 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि नेट टैक्स रेवेन्यू पूरे वर्ष के अनुमान का 29.2 प्रतिशत हासिल कर चुका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 28.6 प्रतिशत था। इससे टैक्स कलेक्शन में सुधार के संकेत मिलते हैं। वहीं, नॉन-टैक्स रेवेन्यू वार्षिक लक्ष्य के 68.2 प्रतिशत तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 75.5 प्रतिशत से कम है। इसके बावजूद सरकार की कुल प्राप्तियां मजबूत बनी हुई हैं।
इस बीच, सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना की भी घोषणा की है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस उधारी कार्यक्रम में 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल होंगे। यह उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से जुटाई जाएगी।