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बजट 2026: रक्षा क्षेत्र में 22% की भारी वृद्धि; स्वदेशी हथियारों और लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली रफ़्तार

Budget 2026: मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 7,84,678 करोड़ कर दिया है। सेना के आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद के लिए पूंजीगत व्यय में 22% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।

रूपम सिंह

India Defence Budget 2026: चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सीमा विवाद और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है। रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7,84,678 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपय के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है। यह आवंटन भारत की अनुमानित जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है।

आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत व्यय में उछाल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बजट का स्वागत करते हुए इसे सेना को सशक्त बनाने वाला बताया। बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'पूंजीगत व्यय' है, जिसे सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित किया गया है। नए हथियार, लड़ाकू विमान और युद्धपोत खरीदने के लिए 2,19,306 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट अनुमान से 21.84 प्रतिशत अधिक है।

विमान और नौसेना बेड़े पर विशेष फोकस

  • रक्षा मंत्रालय की जरूरतों को देखते हुए आवंटन को विशिष्ट मदों में विभाजित किया गया है।
  • वायु सेना: विमानों और एयरो इंजनों की खरीद व रखरखाव के लिए ₹63,733 करोड़ दिए गए हैं।
  • नौसेना: समुद्री सुरक्षा को चाक-चौबंद करने और नए बेड़े के लिए ₹25,023 करोड़ का प्रावधान है।
  • पूंजीगत खरीद: चालू वित्त वर्ष के अनुमान की तुलना में इस बार ₹39,000 करोड़ अतिरिक्त आवंटित किए गए हैं।

'आत्मनिर्भर भारत' और घरेलू उद्योग को बढ़ावा

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए 'मेक इन इंडिया' को प्राथमिकता दी है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पूंजीगत खरीद बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा (करीब ₹1.39 लाख करोड़) घरेलू उद्योगों के माध्यम से खरीद के लिए आरक्षित रखा गया है। इससे न केवल स्वदेशी स्टार्टअप्स को लाभ मिलेगा, बल्कि देश में सैन्य उपकरणों के उत्पादन की क्षमता भी बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने "ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता" का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बजट सेना की परिचालन तैयारियों को अगले स्तर पर ले जाएगा। सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी संप्रभुता की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं है।

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