पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अपडेट, (सोर्स- AI) 
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सस्ता हुआ क्रूड ऑयल, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कब मिलेगी राहत

Petrol-Diesel Price: राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार को 12,000 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा है।

मनोज आर्या

Petrol-Diesel Price Update: पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। पत्रकारों से बातचीत उन्होंने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतों को तय करने में कई कारक भूमिका निभाते हैं। इनमें कम कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल को भारत तक पहुंचने में लगने वाला समय भी शामिल है।

राज्य मंत्री ने कहा कि हाल में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कुछ नरम हुई हैं। इसमें समय लगेगा क्योंकि कम कीमत वाला कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचेगा। वहां जहाजों की आवाजाही काफी अधिक रहेगी। हालात को सामान्य होने में समय लगेगा।

'सरकार को 12,000 करोड़ का नुकसान'

सुरेश गोपी ने कहा कि इस साल पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता का असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर काफी पड़ा। उनके अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार ने इस अतिरिक्त बोझ का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया। उन्होंने कहा कि इस असर को अपने ऊपर लेने के कारण सरकार को 12,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। किसी भी राज्य सरकार ने ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान अपने करों में कमी करके राजस्व नहीं छोड़ा। केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी टिके रहना है।

सिर्फ क्रूड ऑयल से तय नहीं होता ईंधन का भाव

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि बाजार और परिवहन से जुड़े कई अन्य कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.64 प्रतिशत गिरकर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत भी लगभग 2 प्रतिशत घटकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में हुई कूटनीतिक प्रगति के बाद देखने को मिली है। निवेशकों को उम्मीद है कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम होगा।

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