रक्षा बजट 2026 (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Defense Budget 2026: स्वदेशी हथियारों के लिए 2 लाख करोड़ का बड़ा फंड? आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई गति

Indigenous Weapons Fund: रक्षा बजट 2026 में स्वदेशी हथियारों के लिए 2 लाख करोड़ आवंटित हो सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने 20% बढ़त मांगी है, जिससे ब्रह्मोस NG और आकाश NG मिसाइलों की खरीद को रफ्तार मिलेगी।

प्रिया सिंह

Defense Budget 2026 Indigenous Procurement Fund India: आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर रक्षा क्षेत्र में काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं, खासकर स्वदेशी हथियारों की खरीद को लेकर। रक्षा मंत्रालय ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजटीय आवंटन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की है, ताकि सुरक्षा चुनौतियों से निपटा जा सके। अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो घरेलू रक्षा उद्योग से हथियारों की खरीद के लिए 2 लाख करोड़ से अधिक का विशेष फंड आवंटित किया जा सकता है। यह कदम न केवल भारतीय सेनाओं की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

स्वदेशी खरीद का लक्ष्य

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उद्योग के लिए सुरक्षित रखा गया था, जो करीब 1,11,544 करोड़ था। बजट 2026 में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर स्वदेशी खरीद के लिए कुल आवंटन 2 लाख करोड़ के पार ले जाने की योजना पर विचार हो रहा है। इससे भारतीय रक्षा निर्माण इकोसिस्टम में शामिल स्टार्टअप्स और MSMEs को बड़े पैमाने पर नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ गई है।

इन हथियारों पर नजर

रक्षा मंत्रालय नए बजट के माध्यम से 7 प्रमुख स्वदेशी हथियार प्रणालियों की खरीद को प्राथमिकता देने की तैयारी में है, जिनमें ब्रह्मोस-NG और आकाश-NG मिसाइलें शामिल हैं। साथ ही, नौसेना के लिए स्वदेशी पनडुब्बियों के निर्माण और वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमानों को 'सुपर सुखोई' मानक में अपग्रेड करने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। नए युग के युद्ध को देखते हुए ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए भी अलग से बड़ी राशि आवंटित की जा सकती है।

बजट में बड़ी बढ़त

विशेषज्ञों का अनुमान है कि रक्षा मंत्रालय की 20 प्रतिशत की मांग पूरी होने पर कुल रक्षा बजट 8 लाख करोड़ के आंकड़े को छू सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह बजट 6.81 लाख करोड़ था, जिसमें पूंजीगत व्यय के लिए 1.80 लाख करोड़ निर्धारित किए गए थे। पूंजीगत व्यय में होने वाली यह वृद्धि सीधे तौर पर नई तकनीक और आधुनिक साजो-सामान के अधिग्रहण में इस्तेमाल की जाएगी।

आत्मनिर्भरता और निर्यात

भारत सरकार ने साल 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ तक पहुंचाने और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ के पार ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। बजट 2026 में स्वदेशी कंपनियों को मिलने वाला 2 लाख करोड़ का फंड इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। वर्तमान में भारत लगभग 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ी है।

सुरक्षा चुनौतियों का समाधान

सीमा पर जारी तनाव और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए साइबर सुरक्षा और एआई-आधारित हथियार प्रणालियों के लिए भी फंड बढ़ाया जा सकता है। रक्षा सचिव ने संकेत दिए हैं कि देश का औद्योगिक आधार अब इतने बड़े निवेश को संभालने के लिए पूरी तरह से सक्षम और तैयार है। यह बजट केवल सरहद की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भारत को एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

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